• Banaras Now, Varanasi
  • April 20, 2026

वाराणसी, 24 फरवरी 2026: महाशिवरात्रि के बाद काशी में शिव-विवाह परंपरा का भावनात्मक उत्सव अब अपने चरम की ओर बढ़ रहा है। रंगभरी (अमला) एकादशी के अवसर पर 27 फरवरी को बाबा की पारंपरिक पालकी यात्रा निकाली जाएगी। इससे पहले 24 फरवरी से माता गौरा के गौने की रस्मों की शुरुआत होगी, जिसमें काशी की प्राचीन लोक परंपराएं जीवंत होती नजर आएंगी।

24 फरवरी से शुरू होंगी गौने की रस्में

टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास ‘गौरा-सदनिका’ में आयोजित प्रेस वार्ता में महंत पं. वाचस्पति तिवारी ने बताया कि काशी की परंपरा के अनुसार माता गौरा को नगर की बेटी माना जाता है। विवाह के बाद गौने की रस्में उसी पारिवारिक भाव से संपन्न की जाती हैं।

24 फरवरी की शाम 6:45 बजे तेल-हल्दी की रस्म अदा की जाएगी। इससे पहले काशी के प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर में विशेष अनुष्ठान कर हल्दी को वैदिक मंत्रों से अभिमंत्रित किया जाएगा। 11 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा पूजन के बाद शंखनाद और घंटियों की ध्वनि के बीच माता को हल्दी अर्पित की जाएगी। गौनहारिनों द्वारा पारंपरिक मंगलगीत और सोहर गाए जाएंगे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठेगा।

25 फरवरी को पालकी पूजन और षोडशी श्रृंगार

25 फरवरी को दोपहर 3 बजे बाबा की पारंपरिक पालकी का विधिवत पूजन होगा। शाम 6:30 बजे माता गौरा का भव्य षोडशी श्रृंगार किया जाएगा। रेशमी परिधान, आभूषण, पुष्पमालाएं और चंदन-रोली से सुसज्जित माता का रूप दर्शनीय होगा। इस दौरान महंत आवास मायके के रूप में सजाया जाएगा, जहां पारिवारिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजन संपन्न होगा।

26 फरवरी को होगा बाबा का प्रतीकात्मक आगमन

26 फरवरी की शाम 6:30 बजे बाबा का प्रतीकात्मक आगमन गौरा-सदनिका में होगा। यह आयोजन उस परंपरा का प्रतीक है, जब वर पक्ष विवाहोपरांत दुल्हन को विदा कराने मायके पहुंचता है। बाबा को विशेष राजसी परिधान पहनाए जाएंगे। इस वर्ष वे ‘देव किरीट’ धारण करेंगे, जिसे काशी के शिल्पियों ने विशेष रूप से तैयार किया है।

27 फरवरी को निकलेगी भव्य पालकी यात्रा

रंगभरी एकादशी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में विशेष पूजन के बाद सुबह 7 बजे भोग-श्रृंगार और 9 बजे से आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन प्रारंभ होंगे। दोपहर 12:30 बजे भोग आरती के बाद शाम 5 बजे बाबा की भव्य पालकी यात्रा निकलेगी।

पालकी यात्रा टेढ़ीनीम महंत आवास से शुरू होकर नवग्रह मंदिर, विश्वनाथ गली, साक्षी विनायक, ढुंढिराज गणेश और अन्नपूर्णा मंदिर होते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचेगी। वहां गर्भगृह के दक्षिण द्वार से प्रवेश कर चल प्रतिमा को विराजमान कराया जाएगा। शयन आरती के बाद पालकी पुनः महंत आवास लौटेगी। रास्ते भर श्रद्धालु अबीर-गुलाल और पुष्पवर्षा से स्वागत करेंगे।

‘शिवांजलि’ से सजेगा सांस्कृतिक मंच

गौना महोत्सव के दौरान ‘शिवांजलि’ कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें लोक और सुगम संगीत की प्रस्तुतियां होंगी। काशी की पारंपरिक भक्ति धुनें इस आयोजन को सांस्कृतिक गरिमा प्रदान करेंगी।

महंत पं. वाचस्पति तिवारी ने कहा कि रंगभरी एकादशी केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि काशी की जीवंत सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। गौनहारिनों के गीत, वैदिक मंत्रोच्चार और श्रद्धालुओं की सहभागिता इस परंपरा को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ा रही है।

Author

thefrontfaceindia@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *