• Banaras Now, Varanasi
  • April 18, 2026

वाराणसी। संकट मोचन हनुमान मंदिर में आयोजित होने वाला विश्व प्रसिद्ध संकट मोचन संगीत समारोह इस वर्ष और भी खास होने जा रहा है। 103वां आयोजन 6 से 11 अप्रैल 2026 तक मंदिर परिसर में होगा, जिसमें पहली बार 14 मुस्लिम कलाकार भगवान हनुमान के समक्ष अपनी प्रस्तुतियां देंगे।

तीन बड़ी बातें
  • पहली बार 14 मुस्लिम कलाकारों की भागीदारी, सौहार्द का संदेश
  • 11 पद्म पुरस्कार विजेता कलाकारों की प्रस्तुति
  • 150 से अधिक कलाकार, 45 मुख्य कलाकार शामिल

आयोजन की विशेषता

मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने बताया कि यह आयोजन केवल संगीत का मंच नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और समावेश का प्रतीक है। काशी की गंगा-जमुनी तहजीब का यह जीवंत उदाहरण है, जहां सभी धर्मों के लोग एक साथ जुड़ते हैं।


हनुमान जयंती पर विशेष कार्यक्रम

2 से 5 अप्रैल तक रामायण सम्मेलन आयोजित होगा, जिसमें:

  • सुबह विशेष पूजन-आरती
  • श्रीरामचरितमानस का अखंड पाठ
  • रातभर भजन-कीर्तन और रामायण मंडलियों का गायन

मुस्लिम कलाकारों की भागीदारी

इस बार समारोह में उस्ताद गुलाम अब्बास खां, उस्ताद मस्कूर अली खां, शिराज अली खां और मेहताब अली नियाजी सहित कुल 14 मुस्लिम कलाकार प्रस्तुति देंगे।


सभी प्रमुख कलाकारों की सूची (निशा अनुसार)

पहली निशा

रूपवाणी संस्था (निर्देशक: व्योमेश शुक्ल), पं. राहुल शर्मा (संतूर), पं. राम कुमार मिश्र (तबला), विधा लाल (कथक), एस आकाश (बांसुरी), मालिनी अवस्थी (गायन), राहुल मिश्रा (तबला), पं. हरविंदर शर्मा (सितार), शिक्षा भट्टाचार्या (कथक)।

दूसरी निशा (7 अप्रैल)

पं. यू. राजेश (मेंडोलिन), शिवमणि (ड्रम), पं. विश्व मोहन भट्ट (मोहन वीणा), सलिल भट्ट (सात्विक वीणा), उस्ताद गुलाम अब्बास खां (गायन)।

तीसरी निशा (8 अप्रैल)

पं. उल्हास कशालकर, जसपिंदर नरुला, कौशिकी चक्रवर्ती (गायन), पं. विवेक सोनार (बांसुरी), पं. देबाशीष भट्टाचार्या (गिटार), पं. आलोक लाहिड़ी और अभिषेक लाहिड़ी (सरोद)।

चौथी निशा (9 अप्रैल)

पं. देबज्योति बोस (सरोद), वृत्तिश नृसिंह राणा (ओडिसी), पं. यू. राजेश और पं. राजेश वैद्य (वादन), अनूप जलोटा, पं. सतीश व्यास, पं. अजय पोहनकर (गायन)।

पांचवीं निशा (10 अप्रैल)

पं. राम मोहन महाराज (कथक), पं. तेजेंद्र नारायण मजुमदार (सरोद), पं. रोनू मजुमदार (बांसुरी), कंकणा बनर्जी और उस्ताद मस्कूर अली खां (गायन)।

छठवीं निशा (11 अप्रैल)

पं. रतिकांत महापात्रा और सुजाता महापात्रा (ओडिसी), शिराज अली खां (सरोद), मेहताब अली नियाजी (सितार), कलापिनी कोमकली, पं. हरीश तिवारी, साजन मिश्र (गायन), पं. अभय रुस्तम सोपोरी (शतरंत्री वीणा)।


आयोजन समय

यह संगीत समारोह प्रतिदिन शाम 7:30 बजे से शुरू होकर सूर्योदय तक चलेगा। यह आयोजन काशी की आध्यात्मिकता, संगीत और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत संगम है, जो देश-दुनिया को एकता और सौहार्द का संदेश देता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *