वाराणसी। आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही वाराणसी की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। शहर की प्रमुख पांच विधानसभा सीटों—दक्षिण, सेवापुरी, रोहनिया, शिवपुर और अजगरा—पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। पार्टियों के अंदर संभावित उम्मीदवारों को लेकर मंथन जारी है, वहीं दूसरी ओर जनता की नब्ज टटोलने के लिए सर्वे भी शुरू हो गए हैं।
इन सर्वे में एक बड़ा सवाल यह है कि क्या मौजूदा विधायकों को दोबारा मौका दिया जाए या फिर नए चेहरों पर दांव खेला जाए। यही कारण है कि कई सीटों पर पार्टी के भीतर ही प्रतिस्पर्धा बढ़ती नजर आ रही है।
वाराणसी दक्षिणी: मजबूत पकड़ बनाम नए चेहरों की चुनौती
वाराणसी दक्षिणी सीट पर भाजपा के मौजूदा विधायक नीलकंठ तिवारी को लेकर स्थिति दिलचस्प बनी हुई है। एक ओर उनकी संगठनात्मक पकड़ और अनुभव को उनकी ताकत माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के अंदर से ही नए चेहरों की दावेदारी सामने आ रही है।
अंबरीश सिंह भोला, दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ और पूजा दीक्षित जैसे नाम संभावित विकल्प के रूप में चर्चा में हैं। समाजवादी पार्टी की ओर से किशन दीक्षित, लक्ष्मीकांत उर्फ किशमिश गुरु और रमाकांत जायसवाल सक्रिय माने जा रहे हैं। वहीं कांग्रेस में सीताराम केसरी और मनीष मोरोलिया के नाम सामने आ रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबी कुछ नेता भी इस सीट पर दावेदारी कर सकते हैं, लेकिन फिलहाल नीलकंठ तिवारी की पकड़ मजबूत मानी जा रही है।
सेवापुरी: भाजपा में अंदरूनी मुकाबला, सपा और अपना दल भी सक्रिय
सेवापुरी विधानसभा सीट पर भाजपा विधायक नील रतन पटेल (नीलू) के सामने पार्टी के भीतर से ही चुनौती दिखाई दे रही है। अदिति सिंह पटेल, दिलीप पटेल और धर्मेंद्र सिंह जैसे नाम विकल्प के रूप में उभर रहे हैं।
समाजवादी पार्टी से सुरेंद्र पटेल को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है, जबकि अपना दल में महेंद्र पटेल और सियाराम पटेल के बीच मुकाबला देखा जा रहा है। कांग्रेस से आनंद सिंह ‘रिंकू’ का नाम भी चर्चा में है।
स्थानीय समीकरणों में धर्मेंद्र सिंह को एक मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा रहा है, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।
रोहनिया: अपना दल की सीट पर भाजपा और सपा की नजर
रोहनिया सीट पर अपना दल के विधायक सुनील पटेल के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्या उन्हें दोबारा मौका मिलेगा या पार्टी नया चेहरा उतारेगी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
भाजपा की ओर से हंसराज विश्वकर्मा, सुरेंद्र सिंह और सुरेश सिंह के नाम सामने आ रहे हैं। समाजवादी पार्टी से सुभाष राजभर, मनीष सिंह और योगेश सिंह सक्रिय हैं। कांग्रेस की तरफ से राजेश्वर सिंह पटेल और अशोक कुमार सिंह को संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है।
यह सीट गठबंधन और समीकरणों के हिसाब से बेहद अहम मानी जा रही है।
शिवपुर: बहुकोणीय मुकाबले के आसार
शिवपुर विधानसभा सीट पर भाजपा विधायक अनिल राजभर के सामने भी पार्टी के भीतर से ही चुनौती उभर रही है। रामप्रकाश दुबे, पीयूष यादव और संजय सिंह जैसे नाम विकल्प के रूप में चर्चा में हैं।
समाजवादी पार्टी से प्रदीप मौर्या, संजय मिश्रा और उदयलाल मौर्या सक्रिय बताए जा रहे हैं। वहीं बसपा से अजय सिद्धार्थ और श्याम सिंह यादव संभावित उम्मीदवार माने जा रहे हैं।
यह सीट आने वाले चुनाव में बहुकोणीय मुकाबले का केंद्र बन सकती है।
अजगरा: अनुभव बनाम उम्र का मुद्दा
अजगरा विधानसभा सीट पर भाजपा विधायक त्रिभुवन राम को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। एक ओर उनका अनुभव है, वहीं दूसरी ओर उनकी उम्र को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
भाजपा में अपराजिता सोनकर, संजय सोनकर और दिलीप सोनकर के नाम चर्चा में हैं। समाजवादी पार्टी से सुनील सोनकर, कैलाश सोनकर और सत्यप्रकाश सोनकर (सोनू) मैदान में हैं। बसपा से रघुनाथ चौधरी और राहुल राज के बीच विकल्प देखा जा रहा है।
यह सीट सामाजिक समीकरणों के कारण हमेशा से महत्वपूर्ण मानी जाती रही है।
क्या कहते हैं राजनीतिक संकेत?
वाराणसी की इन पांचों सीटों पर एक समान ट्रेंड देखने को मिल रहा है—मौजूदा विधायकों की पकड़ और अनुभव के मुकाबले नए चेहरों की चुनौती लगातार मजबूत हो रही है।
पार्टी के भीतर टिकट को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ने से यह साफ है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार चयन एक बड़ी चुनौती बनने वाला है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वाराणसी की इन सीटों पर मुकाबला इस बार और अधिक कड़ा और रोचक होगा। जनता के बीच स्थानीय मुद्दे, विकास कार्य और उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
2027 चुनाव की तैयारी का संकेत
वर्तमान हलचल को 2027 विधानसभा चुनाव की शुरुआती तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। सभी प्रमुख दल—भाजपा, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बसपा और अपना दल—जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गए हैं।
आने वाले समय में सर्वे, जनसंपर्क अभियान और राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। वाराणसी, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र भी है, यहां की हर सीट का राजनीतिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
