वाराणसी। पूर्वांचल और विशेषकर वाराणसी में इस बार मानसून का मिजाज सुस्त पड़ने से लोग तीखी धूप और भारी उमस से बेहाल हैं। सावन का महीना बीतने को है और अगस्त की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन बादलों ने अब तक जमकर राहत नहीं बरसाई है।
मौसम आंकड़ों के मुताबिक, मानसून के शुरुआती दो महीनों (जून-जुलाई) में शहर में अमूमन 405 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जाती है, लेकिन इस बार आंकड़ा सिमटकर महज 196 मिलीमीटर पर ही अटक गया है। बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज श्रीवास्तव का कहना है कि ‘मानसून ट्रफ’ के दक्षिण दिशा की ओर खिसकने के कारण बारिश का सिलसिला थम सा गया है। हालांकि, उम्मीद जताई जा रही है कि आगामी सप्ताह से मौसम का रुख बदल सकता है।
पारे में उछाल और बढ़ा तापमान
बारिश न होने के चलते तापमान में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। शनिवार को शहर का अधिकतम तापमान सामान्य से 3.5 डिग्री बढ़कर 36.7 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जो शुक्रवार के 35.3 डिग्री सेल्सियस से अधिक था। वहीं न्यूनतम तापमान भी 1.1 डिग्री की बढ़त के साथ 27.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
गंगा और वरुणा के जलस्तर की स्थिति
मानसून की इस सुस्ती का सीधा असर नदियों के जलस्तर पर दिख रहा है। पिछले वर्ष जहां 1 अगस्त को गंगा का जलस्तर खतरे के निशान (71 मीटर) के करीब पहुंच गया था, वहीं इस साल यह 9 मीटर नीचे बना हुआ है। केंद्रीय जल आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वाराणसी में गंगा का जलस्तर फिलहाल 61.92 मीटर पर स्थिर है, जबकि वरुणा नदी का जलस्तर 68.15 मीटर दर्ज किया गया है।
घाटों पर चौकसी और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
सावन के महीने में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क है:
- ललिता घाट: श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए घाट पर स्टील की मजबूत रेलिंग लगाई गई है।
- घाटों पर गश्त: जल पुलिस ने दशाश्वमेध, अस्सी, राजघाट और नमो घाट समेत सभी प्रमुख घाटों पर निगरानी बढ़ा दी है।
- नाविकों को निर्देश: सभी नाव संचालकों को तय क्षमता के भीतर ही सवारी बैठाने और सुरक्षा मानकों के दायरे में नाव चलाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
