नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान की ओर से अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की पेशकश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खास तवज्जो नहीं मिली। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार द्वारा दोनों देशों के बीच ‘मिडिल मैन’ बनने की बात कही गई थी, लेकिन ईरान ने इस प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया।
ईरान ने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तान द्वारा आयोजित किसी भी मंच से उसका कोई लेना-देना नहीं है और यह पूरी तरह पाकिस्तान का अपना मामला है। इस प्रतिक्रिया के बाद पाकिस्तान की पहल पर सवाल उठने लगे हैं।
इजरायल की तीखी प्रतिक्रिया
इस घटनाक्रम पर इजरायल की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। इजरायली विदेश मंत्रालय की विशेष दूत फ्लूर हसन-नहूम ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह इस तरह की मध्यस्थता करने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने पाकिस्तान पर आतंकवाद को लेकर भी निशाना साधा और उसकी मंशा पर सवाल खड़े किए।
भारत की भूमिका की सराहना
इजरायल ने इस दौरान भारत की भूमिका की तारीफ भी की। फ्लूर हसन-नहूम ने कहा कि भारत एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में उभरा है और वैश्विक मंच पर संतुलित तथा सकारात्मक भूमिका निभा रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत जैसे देश अंतरराष्ट्रीय विवादों में बेहतर मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं।
वैश्विक स्तर पर चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक मंच पर मध्यस्थता के लिए विश्वसनीयता और संतुलित कूटनीति जरूरी होती है, जिसमें कुछ देशों की छवि अहम भूमिका निभाती है।
फिलहाल, ईरान-अमेरिका के बीच तनाव जारी है और इस मामले में आगे क्या रुख अपनाया जाएगा, इस पर दुनिया की नजर बनी हुई है।
