वाराणसी: फूलपुर थाना क्षेत्र में हुए कारोबारी मनीष सिंह हत्याकांड की जांच के दौरान हालात और बिगड़ गए, जब आरोपियों की तलाश में गई पुलिस टीम पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया। खालिसपुर गांव में हुई इस घटना में दो पुलिसकर्मियों को बंधक बना लिया गया, हालांकि बाद में पुलिस ने उन्हें सुरक्षित छुड़ा लिया।
सड़क हादसे से शुरू हुआ था मामला
रविवार देर रात घमहापुर गांव में एक सड़क हादसे के बाद यह पूरा विवाद शुरू हुआ था। मनीष सिंह की कार से एक महिला घायल हो गई थी, जिसके बाद गुस्साई भीड़ ने उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने 8 नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
दबिश के दौरान हमला
इसी हत्याकांड में एक आरोपी के खालिसपुर गांव में छिपे होने की सूचना पर SOG (स्वाट) टीम दबिश देने पहुंची थी। टीम ने एक संदिग्ध युवक को पकड़ भी लिया था, लेकिन सिविल ड्रेस में होने के कारण ग्रामीण पुलिसकर्मियों को पहचान नहीं सके और उन्हें विरोधी पक्ष का व्यक्ति समझ बैठे। इसी गलतफहमी में भीड़ उग्र हो गई और पुलिस टीम पर हमला कर दिया।
दो पुलिसकर्मी बनाए गए बंधक
हमले के दौरान एक पुलिसकर्मी किसी तरह मौके से निकलकर अधिकारियों को सूचना देने में सफल रहा, जबकि दो पुलिसकर्मियों को ग्रामीणों ने पकड़ लिया। उनके साथ मारपीट की गई और हथियार छीनने की भी कोशिश हुई। सूचना मिलते ही फूलपुर थाना प्रभारी अतुल कुमार सिंह पुलिस बल और PRB टीम के साथ मौके पर पहुंचे और दोनों को सुरक्षित छुड़ाया।
पुलिस की कार्रवाई तेज
घटना के बाद क्षेत्र में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। डीसीपी गोमती जोन नीतू कादयान समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचकर हालात की निगरानी कर रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, अब तक इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है—हरिश्चंद्र (61 वर्ष) और योगेंद्र प्रजापति (25 वर्ष)। इसके अलावा 11 संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। बाकी आरोपियों की तलाश में क्राइम ब्रांच और फूलपुर थाना पुलिस की संयुक्त टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
पुलिस का बयान
इंस्पेक्टर अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, ग्रामीणों ने गलतफहमी में यह कदम उठाया। मामले में शामिल सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
घटना घमहापुर गांव की है। जानकारी के अनुसार, 38 वर्षीय मनीष सिंह अपनी फैक्ट्री से घर लौट रहे थे। तभी अचानक बिंदू सिंह नाम की एक महिला उनकी कार के सामने आ गईं, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ीं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के बाद मनीष सिंह तुरंत कार से उतरकर महिला की मदद करने लगे और आसपास के लोगों से सहयोग की अपील की। उन्होंने इलाज का पूरा खर्च उठाने की बात भी कही, लेकिन इसी बीच कुछ लोगों से कहासुनी शुरू हो गई, जो जल्द ही हिंसा में बदल गई।
देखते ही देखते 10 से 15 लोगों की भीड़ ने मनीष सिंह पर हमला कर दिया। पहले उन्हें लात-घूंसों से पीटा गया, फिर डंडों से बेरहमी से मारपीट की गई। गंभीर रूप से घायल मनीष सिंह ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना के बाद स्थानीय लोग घायल महिला को अस्पताल ले गए, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिजनों की तहरीर पर 8 नामजद और 7 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। एडीसीपी गोमती जोन नृपेंद्र सिंह ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
इस हृदयविदारक घटना ने मनीष सिंह के परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है। भरथरा गांव निवासी मनीष अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। करीब 20 वर्ष पहले उनके पिता स्वर्गीय गुलाब सिंह का निधन हो गया था, जबकि दो वर्ष पहले उनकी मां भी दुनिया छोड़ चुकी थीं। माता-पिता के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी मनीष के कंधों पर थी।
करीब 10 वर्ष पहले उनकी शादी अंकिता सिंह से हुई थी। उनके परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटियां—मैत्री सिंह (8 वर्ष) और चित्रा सिंह (6 वर्ष)—और एक छह माह का मासूम बेटा भैरव सिंह है। इतनी कम उम्र में बच्चों के सिर से पिता का साया उठ जाना पूरे गांव को झकझोर गया है।
परिवार में उनकी दो बहनें—मनीषा सिंह और मोनिका सिंह—भी हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। भाई की मौत की खबर मिलते ही दोनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों का कहना है कि मनीष ही परिवार का एकमात्र सहारा थे और उनकी हत्या से पूरा परिवार असहाय हो गया है। गांव में मातम पसरा हुआ है और लोग दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
