वाराणसी: गंगा नदी पर एक अत्याधुनिक सिग्नेचर डबल डेकर ब्रिज बनने जा रहा है, जिसकी लागत करीब 2,642 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह नया पुल 139 वर्ष पुराने मालवीय पुल के समानांतर तैयार किया जाएगा। इस ब्रिज के निचले हिस्से में चार रेलवे ट्रैक होंगे, जबकि ऊपरी हिस्से में छह लेन की सड़क बनाई जाएगी।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रखी जाएगी, जिसके बाद निर्माण कार्य औपचारिक रूप से शुरू होगा। यह प्रोजेक्ट काशी में रेल, सड़क और जलमार्ग कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नवंबर 2022 में इस सिग्नेचर ब्रिज की घोषणा की थी। यह योजना काशी रेलवे स्टेशन के व्यापक पुनर्विकास का हिस्सा है। अक्टूबर 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस परियोजना को मंजूरी दी थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने पहले कहा था कि यह पुल तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए आवागमन को आसान बनाएगा, साथ ही व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।
यह नया ब्रिज भारतीय रेलवे के सबसे व्यस्त रूट्स में से एक पर ट्रैफिक दबाव को कम करने में मदद करेगा और परिचालन को अधिक सुचारू बनाएगा।
गौरतलब है कि मालवीय पुल, जिसे पहले डफरिन ब्रिज के नाम से जाना जाता था, वर्ष 1887 में बनाया गया था। बाद में 1948 में इसका नाम बदलकर महान शिक्षाविद् मदन मोहन मालवीय के सम्मान में रखा गया। यह डबल डेकर पुल आज भी गंगा के ऊपर एक महत्वपूर्ण रेल और सड़क संपर्क के रूप में कार्य कर रहा है, हालांकि अब इसकी उम्र काफी हो चुकी है।
नए सिग्नेचर ब्रिज के निर्माण से वाराणसी की यातायात व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी और शहर के बुनियादी ढांचे में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
