वाराणसी के दशाश्वमेध घाट और अस्सी घाट पर गंगा दशहरा के अवसर पर मंगलवार शाम आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। रंग-बिरंगी रोशनी, दीपों और फूलों से सजे घाटों की भव्यता ने श्रद्धालुओं को देव दीपावली जैसी अनुभूति कराई। गंगोत्री सेवा समिति और गंगा सेवा निधि द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रमों में देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।

घाटों पर “हर-हर गंगे” के जयघोष, शंखध्वनि, डमरू की गूंज और वैदिक मंत्रों के उच्चारण से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा। वहीं अस्सी घाट पर मां गंगा को 56 प्रकार के व्यंजनों का विशेष भोग अर्पित किया गया।
501 लीटर दूध से हुआ अभिषेक
मां गंगा की अष्टधातु प्रतिमा का विशेष श्रृंगार कर 501 लीटर दूध, फल, पुष्प और मिष्ठान्न से दुग्धाभिषेक किया गया। वैदिक विधि-विधान के साथ षोडशोपचार पूजन सम्पन्न हुआ। इस दौरान 11 वैदिक ब्राह्मणों ने सामूहिक महाआरती उतारी, जबकि 21 कन्याओं ने रिद्धि-सिद्धि के स्वरूप में चंवर डुलाकर मातृशक्ति का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। श्रद्धालुओं को “स्वच्छ गंगा, निर्मल गंगा” का संकल्प भी दिलाया गया।
11 हजार दीपों से जगमगाए घाट
गंगा सेवा निधि की ओर से दशाश्वमेध घाट को 11 हजार दीपों और 25 कुंतल फूलों से सजाया गया। संस्था के अध्यक्ष सुशांत मिश्र ने बताया कि “एक संकल्प गंगा किनारे” अभियान के जरिए पिछले कई वर्षों से लोगों को गंगा, घाटों और पर्यावरण की स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
अस्सी घाट पर विशेष आरती
अस्सी घाट पर सात अर्चकों द्वारा भव्य गंगा आरती की गई। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने आरती में भाग लेकर मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त किया। दीपों की रोशनी से पूरा घाट अलौकिक छटा बिखेरता नजर आया।

विश्वनाथ धाम में भी हुए धार्मिक अनुष्ठान
गंगा दशहरा के अवसर पर काशी विश्वनाथ धाम में भी विशेष पूजा-अर्चना और वैदिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। प्रातःकाल मंदिर के घाट पर मां गंगा की आरती के बाद अभिषेक सम्पन्न हुआ। इसके बाद धाम परिसर में स्थापित मां गंगा के विग्रह का विधिवत पूजन किया गया।
