वाराणसी: काशी के प्रसिद्ध अन्नपूर्णा मठ मंदिर में संचालित अन्नक्षेत्र में गैस सिलेंडर की कमी के कारण भोजन व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति बन गई थी। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन …
वाराणसी: काशी के प्रसिद्ध अन्नपूर्णा मठ मंदिर में संचालित अन्नक्षेत्र में गैस सिलेंडर की कमी के कारण भोजन व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति बन गई थी। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गैस की आपूर्ति सुनिश्चित कराई।
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के निर्देश पर संबंधित गैस एजेंसी के माध्यम से मंदिर परिसर में 20 गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए गए, जिसके बाद अन्नक्षेत्र की रसोई दोबारा सुचारु रूप से शुरू हो गई।
रोजाना सैकड़ों श्रद्धालुओं को कराया जाता है भोजन
जानकारी के अनुसार अन्नपूर्णा मठ मंदिर के अन्नक्षेत्र में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और जरूरतमंद लोगों को निशुल्क भोजन कराया जाता है। यहां रोजाना सैकड़ों लोगों के लिए भोजन तैयार किया जाता है।
हाल ही में गैस सिलेंडर की कमी के कारण रसोई संचालन प्रभावित होने की सूचना प्रशासन तक पहुंची थी, जिसके बाद तत्काल कदम उठाए गए।
DM के निर्देश पर तुरंत हुई कार्रवाई
मामले की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने संबंधित गैस एजेंसी से संपर्क कर गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके बाद गैस एजेंसी की ओर से मंदिर परिसर में 20 सिलेंडर पहुंचाए गए।
महंत शंकर पुरी से भी की बातचीत
इस दौरान जिलाधिकारी ने मंदिर के महंत शंकर पुरी से भी बातचीत कर अन्नक्षेत्र की स्थिति की जानकारी ली और भविष्य में ऐसी समस्या न हो इसके लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने का भरोसा दिया।
प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं और जरूरतमंदों को भोजन वितरण में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए गैस आपूर्ति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
नई दिल्ली: समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर देश में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने …
नई दिल्ली: समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर देश में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। इसी बीच AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने UCC को लेकर केंद्र सरकार और इसके समर्थकों पर निशाना साधा है।
ओवैसी ने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड के नाम पर हिंदू कानून मुसलमानों पर लागू नहीं किए जा सकते। उनका कहना है कि इस्लाम में विवाह एक धार्मिक संस्कार नहीं बल्कि एक कॉन्ट्रैक्ट (अनुबंध) की तरह होता है।
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इस्लाम में निकाह एक अनुबंध
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि UCC की चर्चा फिर से तेज हो गई है, लेकिन लोगों को यह समझना होगा कि इस्लाम में शादी जन्म-जन्म का बंधन नहीं बल्कि एक समझौता है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज में निकाह को एक कानूनी और सामाजिक अनुबंध के रूप में देखा जाता है।
ओवैसी ने दावा किया कि हिंदू कानूनों में कुछ ऐसे प्रावधान हैं जिन्हें मुसलमानों पर लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अदालतों में कई बार यह कहा गया है कि यदि पत्नी सास-ससुर की देखभाल नहीं करती तो इसे क्रूरता माना जा सकता है, जबकि इस्लाम में ऐसी कोई बाध्यता नहीं है।
उनके अनुसार इस्लाम में माता-पिता की जिम्मेदारी मुख्य रूप से बेटे की होती है।
आदिवासियों पर भी उठाया सवाल
AIMIM नेता ने यह भी सवाल उठाया कि क्या हिंदू मैरिज एक्ट आदिवासी समुदायों पर लागू होगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न समुदायों की अलग-अलग परंपराएं और धार्मिक मान्यताएं हैं, इसलिए एक समान कानून लागू करना आसान नहीं है।
जेंडर जस्टिस पर सरकार को घेरा
ओवैसी ने कहा कि जो लोग जेंडर जस्टिस की बात करते हैं, उन्हें पहले मुस्लिम महिलाओं की शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मुद्दों पर सरकार और समाज की संवेदनशीलता दिखाई नहीं देती, लेकिन UCC की बहस को बार-बार आगे लाया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बढ़ी बहस
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि देश में समान नागरिक संहिता लागू करने का समय आ गया है। अदालत ने यह भी कहा कि इस विषय पर अंतिम निर्णय लेना विधायिका यानी संसद का अधिकार है।
यह टिप्पणी 1937 के शरीयत कानून के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान की गई थी, जिसमें कहा गया है कि कुछ प्रावधान मुस्लिम महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण हैं।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा के पहले दिन पूछे गए एक सवाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रश्न के उत्तर विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द शामिल होने …
लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा के पहले दिन पूछे गए एक सवाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रश्न के उत्तर विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द शामिल होने पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। कई लोगों ने इसे एक जाति से जोड़कर आपत्ति जताई है, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया।
दरअसल, सामान्य हिंदी खंड में एक प्रश्न पूछा गया था— “अवसर के अनुसार बदल जाने वाले के लिए एक शब्द लिखिए।” इसके लिए चार विकल्प दिए गए थे: सदाचारी, पंडित, अवसरवादी और निष्कपट। इनमें ‘पंडित’ शब्द को विकल्प के रूप में शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई जा रही है। परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र का यह हिस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
पहले दिन 5.31 लाख अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा
उप निरीक्षक नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 के तहत आयोजित परीक्षा में पहले दिन 5,31,765 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। परीक्षा प्रदेश के विभिन्न केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कराई गई।
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पेपर लीक की अफवाह फैलाने पर कार्रवाई
भर्ती परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए एसटीएफ और अन्य एजेंसियां सोशल मीडिया की लगातार निगरानी कर रही हैं। इसी दौरान टेलीग्राम पर फर्जी प्रश्नपत्र भेजकर अभ्यर्थियों से ठगी करने के आरोप में लखनऊ में सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
एसटीएफ ने इस मामले में आगरा के न्यू आगरा थाना क्षेत्र की इंजीनियर्स कॉलोनी से आयुष बघेल नामक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह परीक्षा का पेपर लीक होने की अफवाह फैलाकर टेलीग्राम चैनलों के माध्यम से फर्जी प्रश्नपत्र भेजता था और अभ्यर्थियों से पैसे वसूल रहा था। मामले में जांच जारी है।
डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने जताई आपत्ति
इस पूरे मामले पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी प्रश्न या विकल्प से किसी समाज या वर्ग की गरिमा को ठेस पहुंचती है, तो यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी जाति, समुदाय या परंपरा के प्रति अपमानजनक शब्दों या संदर्भों को किसी भी परीक्षा में स्थान नहीं मिलना चाहिए। डिप्टी सीएम ने मामले की तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं और कहा है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या त्रुटि पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ब्रजेश पाठक ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार सभी समाजों के सम्मान, समानता और संवेदनशीलता के सिद्धांत पर काम करती है और प्रदेश के हर नागरिक की गरिमा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
जांच और कार्रवाई की मांग
भाजपा नेता अभिजात मिश्रा ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह का प्रश्न अत्यंत संवेदनशील है और इससे समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने प्रश्नपत्र तैयार करने वाली समिति की जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल विवादित प्रश्न को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है और प्रशासन द्वारा पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है।
वाराणसी, 14 मार्च 2026: जनपद न्यायालय वाराणसी में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीवानी सभागार में जिला जज संजीव शुक्ला ने दीप प्रज्वलित कर …
वाराणसी, 14 मार्च 2026: जनपद न्यायालय वाराणसी में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीवानी सभागार में जिला जज संजीव शुक्ला ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि लोक अदालत समाज में आपसी विवादों को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है और यह परिवारों को जोड़ने का कार्य कर रही है।
अपने संबोधन में जिला जज ने कहा कि लोक अदालत की अवधारणा भारत के लिए नई नहीं है। प्राचीन समय से ही पंचायत व्यवस्था के माध्यम से लोग आपसी बातचीत और समझौते से विवादों का समाधान करते रहे हैं। वर्ष 1987 के अधिनियम के तहत इस व्यवस्था को कानूनी मान्यता प्रदान की गई। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से बिना समय गंवाए गंभीर मामलों का भी त्वरित निस्तारण संभव हो पाता है।
पारिवारिक मामलों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि परिवार समाज की मूल इकाई है और न्यायालय की भूमिका पारिवारिक समरसता बनाए रखने में महत्वपूर्ण है। न्यायालय का उद्देश्य परिवारों को जोड़ना है, तोड़ना नहीं।
17 वैवाहिक जोड़ों को साथ रहने के लिए प्रेरित किया गया
कार्यक्रम में प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय अनिरुद्ध कुमार तिवारी भी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि पारिवारिक न्यायालय के माध्यम से 17 वैवाहिक जोड़ों को फिर से साथ रहने के लिए प्रेरित किया गया।
इस दौरान बनारस व सेंट्रल बार के महामंत्री और राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी आलोक कुमार, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव प्रवीण कुमार, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के जीएम बी.एन. सिंह सहित कई न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।
लाखों मामलों का निस्तारण
राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान जनपद न्यायालय वाराणसी में कुल 44,712 मामलों का निस्तारण किया गया, जिसमें 6,64,37,588.47 रुपये की वसूली हुई।
वहीं प्रशासन एवं अन्य विभागों द्वारा 4,36,502 मामलों का निस्तारण कर 10,29,13,390 रुपये की वसूली के लिए समझौता कराया गया।
इस प्रकार न्यायालय और प्रशासन के विभिन्न विभागों को मिलाकर कुल 4,81,214 मामलों का निस्तारण किया गया, जिससे करीब 16.93 करोड़ रुपये की धनराशि की वसूली सुनिश्चित हुई।
वाराणसी: आईआईटी-बीएचयू में आयोजित वार्षिक तकनीकी उत्सव ‘टेक्नेक्स-26’ के दूसरे दिन आधुनिक तकनीक और रक्षा उपकरणों का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। कार्यक्रम में रोबोट, ड्रोन और सेना के अत्याधुनिक हथियारों …
वाराणसी: आईआईटी-बीएचयू में आयोजित वार्षिक तकनीकी उत्सव ‘टेक्नेक्स-26’ के दूसरे दिन आधुनिक तकनीक और रक्षा उपकरणों का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। कार्यक्रम में रोबोट, ड्रोन और सेना के अत्याधुनिक हथियारों ने छात्रों और दर्शकों को खूब आकर्षित किया। मंच पर ह्यूमनॉइड रोबोट के डांस से लेकर ‘सुल्तान’ रोबो डॉग की दौड़ तक ने लोगों को हैरान कर दिया।
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स्वतंत्रता भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान चीन के यूनिट्री G1 ह्यूमनॉइड रोबोट ने स्टेज पर डांस कर अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। वहीं ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत तैयार मल्टी-यूटिलिटी लेग्ड इक्विपमेंट (MULE) रोबोट, जिसे ‘सुल्तान’ नाम दिया गया है, ने अपनी तेज रफ्तार और संतुलन का प्रदर्शन किया। यह रोबोट चार पैरों पर जानवर की तरह चल सकता है और कठिन इलाकों में सेना की मदद के लिए तैयार किया गया है।
हथेली से भी छोटा ड्रोन बना आकर्षण
प्रदर्शनी में सेना ने माइक्रो ड्रोन ‘ब्लैक हॉरनेट’ का भी प्रदर्शन किया। महज 33 ग्राम वजन वाला यह ड्रोन हथेली से भी छोटा है और करीब 2 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है। दो कैमरों से लैस यह ड्रोन बिना आवाज किए दुश्मन के ठिकानों की जानकारी सेना तक पहुंचाने में सक्षम है। इसकी कीमत लगभग 1.5 करोड़ रुपये बताई गई, जिसे सुनकर कई लोग हैरान रह गए।
आधुनिक हथियारों की भी प्रदर्शनी
डिफेंस सिंपोजियम 2.0 के तहत भारतीय सेना और गढ़वाल राइफल्स के जवानों ने कई आधुनिक हथियारों और तकनीकों की प्रदर्शनी लगाई। इसमें AK-203 असॉल्ट राइफल, स्नाइपर गन, एलएमजी, फुली ऑटोमैटिक ग्रेनेड लॉन्चर, सर्विलांस ड्रोन, नैनो ड्रोन और अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल शामिल रहे। छात्रों को इन उपकरणों को करीब से देखने और कुछ को हाथ में लेकर अनुभव करने का मौका भी मिला।
पहाड़ों में ड्यूटी की चुनौतियां भी बताईं
कार्यक्रम में ब्रिगेडियर बी.एम. कारियाप्पा ने सैनिकों के पहाड़ी इलाकों में काम करने की चुनौतियों पर प्रकाश डाला और कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों के अनुभव साझा किए। इस दौरान छात्रों ने हाल के अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में ड्रोन तकनीक के उपयोग और भारत की स्थिति को लेकर भी सवाल पूछे।
1500 से अधिक छात्र पहुंचे
आईआईटी-बीएचयू के इस वार्षिक तकनीकी उत्सव के 87वें संस्करण में देशभर से करीब 1500 छात्र-छात्राएं भाग लेने पहुंचे हैं। इस वर्ष टेक्नेक्स की थीम “Fragments of Infinity” रखी गई है। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में तकनीकी प्रस्तुतियां, ऑटो एक्सपो और डिफेंस प्रदर्शनी जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
वाराणसी: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक परिस्थितियों का असर अब देश के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है। रसोई गैस (एलपीजी) की कथित कमी के चलते वाराणसी के …
वाराणसी: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक परिस्थितियों का असर अब देश के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है। रसोई गैस (एलपीजी) की कथित कमी के चलते वाराणसी के प्रसिद्ध मां अन्नपूर्णा अन्नक्षेत्र ट्रस्ट की रसोई व्यवस्था प्रभावित हो गई है। ट्रस्ट की एक शाखा में प्रसाद बनना पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जबकि दूसरी शाखा में गैस की बचत को ध्यान में रखते हुए भोजन के मेन्यू में कटौती की जा रही है।
इस मुद्दे को लेकर उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर ट्वीट कर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि धर्म की नगरी काशी में गैस की किल्लत और सरकारी नियमों के कारण मां अन्नपूर्णा मंदिर में प्रसाद नहीं बन सका, जिससे कई श्रद्धालुओं को बिना प्रसाद लिए ही लौटना पड़ा।
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एक शाखा की रसोई पूरी तरह बंद
ट्रस्ट से जुड़े लोगों के अनुसार अन्नक्षेत्र की दूसरी शाखा में रसोई पूरी तरह बंद करनी पड़ी है। बताया गया कि उपलब्ध गैस सिलेंडर खत्म हो चुके हैं और नए सिलेंडर समय पर नहीं मिल पा रहे हैं, जिसके कारण प्रसाद बनाना संभव नहीं हो पा रहा है।
25 साल पुरानी है अन्नदान की परंपरा
मां अन्नपूर्णा अन्नक्षेत्र ट्रस्ट की स्थापना लगभग 25 वर्ष पहले महंत रामेश्वर पुरी ने की थी। उन्होंने संकल्प लिया था कि यहां प्रसाद वितरण कभी बंद नहीं होगा। कोरोना महामारी के कठिन दौर में भी इस अन्नक्षेत्र में प्रतिदिन हजारों जरूरतमंदों और श्रद्धालुओं को भोजन कराया जाता रहा।
रोजाना 8 से 10 हजार श्रद्धालु करते हैं प्रसाद ग्रहण
सामान्य दिनों में यहां प्रतिदिन लगभग 8 से 10 हजार श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। लेकिन वर्तमान स्थिति में कई श्रद्धालुओं को बिना प्रसाद लिए ही वापस लौटना पड़ रहा है। दूर-दराज से काशी आए भक्तों को ट्रस्ट की ओर से बताया जा रहा है कि गैस की कमी के कारण फिलहाल प्रसाद बनाना संभव नहीं है।
श्रद्धालुओं में निराशा
देश के अलग-अलग राज्यों से काशी पहुंचे कई श्रद्धालुओं ने इस स्थिति पर निराशा जताई। उनका कहना है कि वे मां अन्नपूर्णा का प्रसाद ग्रहण करने की विशेष इच्छा लेकर आए थे, लेकिन यहां पहुंचने पर प्रसाद न मिलने से निराश होकर लौटना पड़ रहा है।
हालांकि ट्रस्ट की पहली शाखा में फिलहाल प्रसाद वितरण जारी है, लेकिन वहां भी सीमित संसाधनों के साथ व्यवस्था संचालित की जा रही है। श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य होने पर अन्नदान की परंपरा फिर से पूरी तरह शुरू हो जाएगी।
वाराणसी: काशी को स्मार्ट और व्यवस्थित शहर बनाने की दिशा में नगर निगम ने एक बड़ा कदम उठाया है। शहर में जगह-जगह फैले बेतरतीब तारों के मकड़जाल को हटाने की तैयारी …
वाराणसी: काशी को स्मार्ट और व्यवस्थित शहर बनाने की दिशा में नगर निगम ने एक बड़ा कदम उठाया है। शहर में जगह-जगह फैले बेतरतीब तारों के मकड़जाल को हटाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने सभी इंटरनेट और डिश टीवी सेवा प्रदाता कंपनियों को निर्देश दिया है कि शहर में फैले ओवरहेड तारों को हटाकर व्यवस्थित किया जाए। इस अभियान में स्मार्ट सिटी परियोजना भी नगर निगम की मदद करेगी।
नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि शहर की सड़कों और गलियों में लटकते तार न केवल अव्यवस्था फैलाते हैं बल्कि काशी आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के सामने शहर की नकारात्मक छवि भी प्रस्तुत करते हैं। ऐसे में सभी कंपनियों के सहयोग से शहर को केबल मुक्त बनाने की योजना बनाई गई है।
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कंपनियों ने दी सहमति, अंडरग्राउंड होंगे तार
इस संबंध में नगर आयुक्त ने रिलायंस जियो, एयरटेल, वोडाफोन, बीएसएनएल और जीटीपीएल सहित कई केबल कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक में सभी कंपनियों ने शहर को तारों के जाल से मुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी माना कि सड़कों और गलियों में फैले तार शहर की सुंदरता को प्रभावित करते हैं, इसलिए इन्हें हटाना आवश्यक है।
स्मार्ट सिटी के अंडरग्राउंड ओएफसी का होगा उपयोग
नगर आयुक्त ने बताया कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत जिन क्षेत्रों में अंडरग्राउंड ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) की सुविधा उपलब्ध है, वहां कंपनियां अपने ओवरहेड तारों को हटाकर उन्हें जमीन के नीचे शिफ्ट करेंगी। इसके अलावा सीएम ग्रिड योजना के तहत बनाए गए यूटिलिटी डक्ट का भी इस्तेमाल केबल बिछाने के लिए किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि खंभों पर लटकते तारों को व्यवस्थित करने के लिए एयरटेल की ओर से विशेष वायर कवरिंग बॉक्स का मॉडल भी प्रस्तुत किया गया है, जिससे तारों को सुरक्षित और सुव्यवस्थित रखा जा सकेगा।
लहुराबीर से मैदागिन तक पहले चरण में काम
नगर आयुक्त के अनुसार पहले चरण में लहुराबीर से मैदागिन, मैदागिन से गोदौलिया और कालभैरव मंदिर मार्ग जैसे प्रमुख मार्गों पर वायर कवरिंग बॉक्स का प्रयोग किया जाएगा। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो इसे पूरे शहर में लागू किया जाएगा।
तंग गलियों में दीवारों पर लगाए जाएंगे क्लैंप
मणिकर्णिका घाट और ठठेरी बाजार जैसी तंग गलियों में जहां बिजली के खंभे नहीं हैं, वहां स्थानीय भवन स्वामियों के सहयोग से दीवारों पर क्लैंप लगाए जाएंगे। इन क्लैंप की मदद से तारों को कसकर व्यवस्थित किया जाएगा, जिससे गलियों में फैले तारों के जाल को खत्म किया जा सके।
नगर निगम का मानना है कि इस पहल से शहर की सुंदरता बढ़ेगी और वाराणसी आने वाले पर्यटकों को एक साफ-सुथरा और व्यवस्थित शहर देखने को मिलेगा।
पिंडरा (वाराणसी)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां पर कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर पिंडरा क्षेत्र में गुरुवार को विरोध प्रदर्शन किया गया। हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने बिहार के एक …
पिंडरा (वाराणसी)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां पर कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर पिंडरा क्षेत्र में गुरुवार को विरोध प्रदर्शन किया गया। हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने बिहार के एक युवक के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उसका पुतला फूंककर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
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हिंदू युवा वाहिनी, वाराणसी के तत्वावधान में ब्लॉक इकाई पिंडरा के पदाधिकारियों ने ब्लॉक अध्यक्ष निर्मल सिंह धीरू के नेतृत्व में रमईपुर चौराहे पर प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री की मां के खिलाफ की गई कथित टिप्पणी को लेकर आक्रोश जताया और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने थाना प्रभारी अतुल कुमार सिंह को ज्ञापन सौंपकर संबंधित युवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। कार्यकर्ताओं का कहना था कि इस प्रकार की टिप्पणियां सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करती हैं और ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
इस मौके पर ब्लॉक उपाध्यक्ष नीरज सिंह, ब्लॉक महामंत्री अभिषेक सिंह, महामंत्री सौरभ सिंह, ब्लॉक मंत्री पंकज प्रजापति, ब्लॉक मंत्री विवेक कुमार सिंह, सप्पु पाल, संतोष मिश्रा, आनंद चौबे सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
वाराणसी। मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध और सैन्य तनाव का असर अब काशी के पर्यटन उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। खाड़ी देशों और ईरान-इजराइल क्षेत्र में बढ़ते तनाव के …
वाराणसी। मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध और सैन्य तनाव का असर अब काशी के पर्यटन उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। खाड़ी देशों और ईरान-इजराइल क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण वाराणसी आने वाले विदेशी पर्यटकों समेत कई लोगों ने अपनी यात्रा योजनाएं रद्द कर दी हैं। इससे शहर के होटल, गेस्ट हाउस और ट्रैवल एजेंसियों के कारोबार पर सीधा असर पड़ा है।
पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार मार्च और अप्रैल का महीना विदेशी पर्यटकों की आमद के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन इस बार अचानक बड़ी संख्या में बुकिंग रद्द होने से पर्यटन उद्योग को बड़ा झटका लगा है। अनुमान है कि अब तक करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक के संभावित कारोबार पर असर पड़ चुका है।
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पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि पिछले एक सप्ताह में 200 से अधिक विदेशी पर्यटकों ने अपनी वाराणसी यात्रा रद्द या स्थगित कर दी है। यूरोप और खाड़ी देशों से आने वाले पर्यटकों की बड़ी संख्या में बुकिंग कैंसिल होने से होटल, गेस्ट हाउस और ट्रैवल एजेंसियों को सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इस बीच खाड़ी देशों में काम करने वाले पूर्वांचल के लोगों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार दुबई, कतर, सऊदी अरब और ओमान समेत अन्य देशों में वाराणसी, गाजीपुर, जौनपुर, भदोही और मिर्जापुर के करीब 200 से अधिक लोग फिलहाल फंसे हुए बताए जा रहे हैं। हवाई उड़ानों के प्रभावित होने और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के कारण उनकी घर वापसी फिलहाल मुश्किल बनी हुई है।
इसके अलावा इजराइल में सेवायोजन कार्यालय के माध्यम से वाराणसी से 37 लोग काम के लिए गए हुए हैं। युद्ध की स्थिति को देखते हुए वहां भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और उड़ानों पर असर पड़ने से उनकी वापसी फिलहाल टल गई है।
दुबई में काम कर रहे वाराणसी निवासी अशोक यादव ने फोन पर बताया कि युद्ध के कारण वहां का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया है। कई स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और कुछ उड़ानों को भी प्रभावित किया गया है। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने भारत लौटने के लिए टिकट बुक कराई थी, लेकिन अचानक फ्लाइट कैंसिल हो गई, जिससे अब लोग नई उड़ानों की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं।
पर्यटन कारोबारियों का कहना है कि मीडिया में लगातार युद्ध और तनाव की खबरें प्रसारित होने के कारण पर्यटक फिलहाल यात्रा करने से बच रहे हैं। कई लोगों ने पहले से कराई गई बुकिंग को आगे की तारीखों में शिफ्ट कराने का अनुरोध भी किया है।
टूर प्लानर सुधांशु सक्सेना का कहना है कि पिछले एक सप्ताह में 200 से अधिक विदेशी पर्यटकों ने अपनी वाराणसी यात्रा रद्द या स्थगित कर दी है। वहीं ट्रैवल एजेंट गौतम पांडेय के मुताबिक मार्च और अप्रैल का समय विदेशी पर्यटकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है, लेकिन इस बार कई टूर पैकेज कैंसिल हो गए हैं। यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो पर्यटन कारोबार को और नुकसान हो सकता है।
ट्रैवल एजेंट अरविंद शुक्ला ने बताया कि खाड़ी देशों और यूरोप से आने वाले पर्यटकों की संख्या में अचानक गिरावट आई है। कई लोगों ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपनी यात्रा आगे बढ़ा दी है, जिससे होटल और ट्रैवल सेक्टर प्रभावित हुआ है।
वहीं ट्रैवल एजेंट सूर्यांश तिवारी का कहना है कि कई पर्यटक फिलहाल स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं। जैसे ही हालात सुधरेंगे, तब वे अपनी यात्रा दोबारा प्लान कर सकते हैं।
वाराणसी। शहर के समग्र विकास, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं को मजबूत बनाने के लिए नगर निगम और बीएचयू ने संयुक्त रूप से काम करने का फैसला किया है। इस संबंध …
वाराणसी। शहर के समग्र विकास, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं को मजबूत बनाने के लिए नगर निगम और बीएचयू ने संयुक्त रूप से काम करने का फैसला किया है। इस संबंध में नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल और बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी के बीच हुई बैठक में कई अहम परियोजनाओं पर सहमति बनी। दोनों संस्थानों के बीच जल्द ही एक औपचारिक समझौता (एमओयू) किया जाएगा, जिसके तहत विभिन्न विकास कार्यों को संयुक्त रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।
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बैठक में तय किया गया कि विश्वविद्यालय के बाहरी क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके तहत मालवीय गेट से डाफी तक के मार्ग का सुंदरीकरण किया जाएगा, जिससे इस इलाके में यातायात व्यवस्था बेहतर होने के साथ-साथ क्षेत्र की सुंदरता भी बढ़ेगी। इसके अलावा कंदवा क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए नई जलनिकासी लाइन बिछाने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराया जाएगा।
विश्वविद्यालय परिसर के भीतर भी स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और निराश्रित पशुओं के नियंत्रण के लिए नगर निगम अपनी सेवाएं उपलब्ध कराएगा। इससे परिसर में रहने वाले हजारों छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा और परिसर का वातावरण अधिक स्वच्छ और व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।
इस साझेदारी का एक अहम पहलू शैक्षणिक समन्वय भी होगा। इसके तहत हर वर्ष बीएचयू के 50 छात्रों को नगर निगम में इंटर्नशिप का अवसर दिया जाएगा। इससे छात्रों को शहरी नियोजन, नगर प्रबंधन और सामाजिक उद्यमिता जैसे विषयों का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा, जो उनके करियर के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी दोनों संस्थान मिलकर कार्य करेंगे। नगर निगम द्वारा डोमरी क्षेत्र में विकसित किए गए शहर के सबसे बड़े मियावाकी अर्बन फॉरेस्ट के संरक्षण और देखरेख में बीएचयू के वनस्पति वैज्ञानिक सहयोग करेंगे। वैज्ञानिक समय-समय पर क्षेत्र का निरीक्षण कर पौधों के बेहतर विकास के लिए तकनीकी सुझाव देंगे। यह पहल काशी में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के साथ-साथ शहरी वनीकरण के एक प्रभावी मॉडल के रूप में भी सामने आ सकती है।
बैठक के दौरान नगर निगम और बीएचयू के बीच लंबे समय से चल रहा संपत्ति कर विवाद भी सुलझा लिया गया। नगर निगम ने विश्वविद्यालय को कुछ पुरानी देनदारियों में राहत दी है, जबकि बीएचयू ने शेष बकाया राशि को किस्तों में चुकाने पर सहमति जताई है। इस सहमति से दोनों संस्थानों के बीच सहयोग का नया रास्ता खुल गया है।