वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की एक पूर्व महिला खिलाड़ी द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न, मारपीट और कपड़े बदलते समय वीडियो बनाने के गंभीर आरोपों पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम कोर्ट) …
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की एक पूर्व महिला खिलाड़ी द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न, मारपीट और कपड़े बदलते समय वीडियो बनाने के गंभीर आरोपों पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम कोर्ट) ने कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने विश्वविद्यालय के एक सुरक्षा अधिकारी को नोटिस जारी कर दिया है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 जुलाई की तारीख तय की है। इस शिकायत में प्रॉक्टोरियल बोर्ड के एक सुरक्षा अधिकारी और 4 महिला सुरक्षाकर्मियों समेत कुल 7 लोगों को नामजद किया गया है।
पूर्व खिलाड़ी के अनुसार, यह पूरा विवाद साल 2023 से शुरू हुआ था जब वह विश्वविद्यालय में खेलती थीं। उन्होंने अपने प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि 13 जून 2023 को उन्हें करीब 12 घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया था और दो महिलाओं ने उनके साथ मारपीट करते हुए उन्हें धमकी दी थी। पीड़िता का आरोप है कि इसी दौरान कपड़े बदलते समय उनका एक वीडियो भी गुपचुप तरीके से बनाया गया और उनका यौन उत्पीड़न किया गया।
पीड़िता ने अपनी याचिका में यह भी बताया कि उनके साथ प्रताड़ना का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। 9 सितंबर 2025 को जब वह प्रॉक्टोरियल बोर्ड के कार्यालय गई थीं, तब वहां मौजूद आरोपियों ने उनके साथ बदसलूकी और मारपीट की। इस दौरान वर्दी पहने एक आरोपी ने उन्हें जबरन पकड़ने (शाारीरिक शोषण) की कोशिश की और विरोध करने पर उनका मोबाइल फोन छीनकर जमीन पर फेंक कर तोड़ दिया, ताकि सबूत नष्ट किए जा सकें।
स्थानीय पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन से कोई मदद न मिलने के बाद पीड़िता को अदालत की शरण लेनी पड़ी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उन्होंने सबसे पहले लंका थाने में शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद उन्होंने 24 जून 2026 को पुलिस आयुक्त को भी रजिस्टर्ड डाक के जरिए न्याय की गुहार लगाते हुए प्रार्थना पत्र भेजा, पर वहां से भी निराशा ही हाथ लगी। इस पूरे मामले पर बीएचयू के चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर संदीप पोखरिया ने बयान दिया है कि मामला अब उनके संज्ञान में है और विश्वविद्यालय स्तर पर इसकी जांच की जा रही है।
वाराणसी: जिले के सिंधौरा थाना क्षेत्र अंतर्गत मझवां गांव से एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहां गुरुवार रात करीब 9 बजे जमीन पर कब्जे के पुश्तैनी विवाद ने हिंसक रूप …
वाराणसी: जिले के सिंधौरा थाना क्षेत्र अंतर्गत मझवां गांव से एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहां गुरुवार रात करीब 9 बजे जमीन पर कब्जे के पुश्तैनी विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। मामूली कहासुनी से शुरू हुआ झगड़ा इस कदर बढ़ा कि एक चचेरे भाई ने दूसरे की जान ले ली। हमलावर भाई घर से पिस्टल लेकर आया और अपने ही चचेरे भाई की कनपटी पर सटाकर गोली दाग दी। पड़ोस में रहने वाले चचेरे भाई बबलू सिंह और 20 वर्षीय सौरभ सिंह उर्फ बंटी (पुत्र लालू सिंह) के बीच मकान और जमीन के टुकड़े को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी। इससे पहले भी दोनों पक्षों में कई बार कहासुनी हो चुकी थी, लेकिन गुरुवार की रात यह विवाद हिंसक झड़प में बदल गया।
बीच-बचाव भी रहा नाकाम, मौके पर ही थमी सांसें
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोनों पक्षों को लड़ता देख आसपास के ग्रामीणों ने बीच-बचाव करने की पुरजोर कोशिश की। मगर हमलावर बबलू सिंह पर खून सवार था। उसने आव देखा न ताव, सीधे सौरभ के सिर को निशाना बनाकर गोली मार दी। गोली लगते ही सौरभ खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़ा और मौके पर ही उसने दम तोड़ दिया।
बाइक से फरार हुए हमलावर
हत्याकांड को अंजाम देने के बाद मुख्य आरोपी बबलू सिंह अपने भाई के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर भागने लगा। ग्रामीणों ने हौसला दिखाते हुए कुछ दूर तक उनका पीछा भी किया, लेकिन आरोपी चकमा देकर फूलपुर की तरफ रफूचक्कर होने में कामयाब रहे।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही टूट चुकी थी सांसों की डोर
घटना के तुरंत बाद बदहवास परिजन और ग्रामीण लहूलुहान सौरभ को लेकर पास के डॉक्टर के पास भागे, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। बाद में मौके पर पहुंची पुलिस की मौजूदगी में शव को शहर के दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां भी डॉक्टरों ने उसे मृत ही बताया। जवान बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
छावनी में तब्दील हुआ गांव, धरपकड़ के लिए टीमें गठित
वारदात की गंभीरता को देखते हुए सिंधौरा थाना प्रभारी ने तुरंत उच्चाधिकारियों को मामले की जानकारी दी। घटना के बाद गांव में पनपे तनाव को देखते हुए एडीसीपी गोमती जोन, एसीपी पिंडरा और एसओजी (SOG) समेत कई थानों की भारी पुलिस फोर्स मौके पर तैनात कर दी गई है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और फरार आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है।
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में करीब चार साल पहले हुए एक सनसनीखेज हत्याकांड में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कपसेठी थाना क्षेत्र में अपनी ही सहेली की फावड़े से …
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में करीब चार साल पहले हुए एक सनसनीखेज हत्याकांड में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कपसेठी थाना क्षेत्र में अपनी ही सहेली की फावड़े से गला काटकर बेरहमी से हत्या करने के मामले में अपर जिला जज आलोक कुमार की अदालत ने मुख्य आरोपी राखी वर्मा को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है।
इसके साथ ही कोर्ट ने दोषी महिला पर एक लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने आदेश दिया कि इस जुर्माने की 70 प्रतिशत राशि पीड़ित महिला के अनाथ हुए बच्चों को मुआवजे (क्षतिपूर्ति) के रूप में दी जाएगी। इस पूरे मामले के ट्रायल के दौरान अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से 9 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए।
ब्लाउज डिजाइन के बहाने घर बुलाया, फिर दी दर्दनाक मौत
यह पूरी वारदात 21 अप्रैल 2022 की सुबह घटित हुई थी। दोषी राखी वर्मा ने अपनी सहेली कंचन वर्मा को फोन करके ब्लाउज का डिजाइन देखने के बहाने मंटूका (कपसेठी) स्थित अपने घर बुलाया था। कंचन अपने पति संजय वर्मा की बाइक से राखी के घर पहुंची।
इसके करीब 45 मिनट बाद राखी ने खुद कंचन के ही मोबाइल से उसके पति संजय को फोन किया और बेहद ठंडे दिमाग से कहा कि पुलिस (डायल 112) को फोन करो और आकर अपनी पत्नी को ले जाओ।
छत पर खून से लथपथ मिली लाश
जब बदहवास पति संजय राखी के घर पहुंचा, तो उसे पता चला कि दोनों महिलाएं छत पर बने कमरे में हैं। छत पर जाने पर कमरा अंदर से बंद मिला। जब दरवाजा खुला तो अंदर का नजारा खौफनाक था। कंचन का खून से लथपथ शव जमीन पर पड़ा हुआ था, उसका गला पूरी तरह कटा हुआ था और पास में ही वारदात में इस्तेमाल किया गया लहूलुहान फावड़ा पड़ा था। पति की सूचना पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने तुरंत सबूत जुटाए और फावड़े को अपने कब्जे में लिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्रूरता की पुष्टि
पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों की गवाही और रिपोर्ट से साफ हुआ कि कंचन की मौत अत्यधिक खून बहने (हेमरेजिक शॉक) के कारण हुई थी। मृतका के चेहरे, गले और छाती पर धारदार हथियार से कई वार किए गए थे। उसके गले पर चार गहरे घाव थे, जिनमें से दो हड्डियों तक जा पहुंचे थे। इसके अलावा छाती पर 18 सेंटीमीटर लंबा गहरा चीरा पाया गया। प्रयोगशाला की जांच में भी घटनास्थल और फावड़े पर इंसानी खून होने की पुष्टि हुई थी।
समलैंगिकता और एकतरफा झुकाव बना हत्या की वजह
पुलिस की तफ्तीश और अदालत में पेश दलीलों के अनुसार, दोनों महिलाओं के बीच बेहद घनिष्ठ और अंतरंग संबंध थे। आरोपी महिला के बयानों से यह साफ हुआ कि इस हत्या के पीछे समलैंगिक संबंध (लेस्बियन रिलेशनशिप) की बात सामने आई। आरोपी राखी चाहती थी कि कंचन हमेशा उसके साथ ही रहे, लेकिन जब कंचन ने इसके लिए मना किया या दूरी बनानी चाही, तो राखी ने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दे डाला।
हालांकि, बचाव पक्ष (राखी के वकील) ने कोर्ट में दलील दी थी कि राखी ने साल 2021 में ग्राम प्रधानी का चुनाव लड़ा था, इसलिए राजनीतिक रंजिश के तहत उसे इस मामले में झूठा फंसाया जा रहा है। लेकिन अदालत ने तमाम वैज्ञानिक सबूतों और गवाहों के आधार पर इस दलील को खारिज कर दिया।
‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ श्रेणी का मामला नहीं: कोर्ट
सुनवाई के आखिरी दिन सरकारी वकील ने इस हत्याकांड को बेहद क्रूर, बर्बर और अमानवीय बताते हुए दोषी राखी वर्मा के लिए फांसी (मृत्युदंड) की मांग की थी। वहीं, बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि अभियुक्त एक महिला है और उसका भविष्य देखते हुए सजा में नरमी बरती जाए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद माननीय न्यायालय ने माना कि यह मामला ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ (Rarest of Rare) की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए फांसी की जगह उम्रकैद की सजा देना ही न्यायसंगत होगा।
वाराणसी। चौक थाना पुलिस ने एक कारोबारी से करीब 3 करोड़ रुपये की जालसाजी करने के आरोप में तीन शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने खुद को एक प्रतिष्ठित …
वाराणसी। चौक थाना पुलिस ने एक कारोबारी से करीब 3 करोड़ रुपये की जालसाजी करने के आरोप में तीन शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने खुद को एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र का स्वामी बताकर पीड़ित का भरोसा जीता और रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) की प्रतिबंधित जमीन पर बने मकान का सौदा कर डाला।
योग क्लास से शुरू हुआ ठगी का खेल
पीड़ित कारोबारी अपने व्यापार को विस्तार देने के लिए वाराणसी में एक उपयुक्त मकान की तलाश में था। इसी दौरान उसके परिवार को योग सिखाने वाले राजकुमार बाजपेयी ने इस जरूरत का फायदा उठाया। राजकुमार ने कारोबारी को झांसा दिया कि मलदहिया इलाके में उसके कुछ बेहद करीबी परिचितों का एक शानदार मकान बिकने के लिए उपलब्ध है।
योग शिक्षक की बातों में आकर जब पीड़ित ने संपत्ति के कागजात मांगे, तो आरोपियों ने पूरी तैयारी के साथ फर्जी दस्तावेज सामने रख दिए। उन्होंने पीड़ित को विश्वास दिलाया कि मकान पूरी तरह वैध है। साज़िश को पुख्ता करने के लिए उन्होंने कहानी रची कि मकान पर थोड़ा लोन बकाया है, जिसे चुकाते ही रजिस्ट्री कर दी जाएगी। खुद को मीडिया जगत की प्रभावशाली हस्ती बताकर उन्होंने कारोबारी का भरोसा जीता और अलग-अलग किश्तों में ₹3 करोड़ की भारी-भरकम रकम ऐंठ ली।
ऐसे खुला राज:
रकम हड़पने के बाद जब आरोपी रजिस्ट्री करने में आनाकानी करने लगे, तो पीड़ित को शक हुआ। इसी बीच आरोपियों ने उसे एक बंद लिफाफे में प्रॉपर्टी से जुड़ा एक दस्तावेज थमाया। कारोबारी ने जब स्वतंत्र रूप से उसकी जांच करवाई, तो पता चला कि वह पूरी इमारत सेना/रक्षा मंत्रालय की जमीन पर बनी है, जिसका कानूनी तौर पर कोई क्रय-विक्रय हो ही नहीं सकता।
पैसे मांगने पर दी जान से मारने की धमकी
ठगी का अहसास होने पर जब पीड़ित ने अपनी गाढ़ी कमाई वापस मांगी, तो आरोपियों का रवैया पूरी तरह बदल गया। उन्होंने अपने कथित मीडिया रसूख की धौंस दिखाते हुए पीड़ित के साथ गाली-गलौज की और उसे जान से मारने की धमकी तक दे डाली।
पीड़ित की शिकायत पर चौक थाना पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। साक्ष्य जुटाने के बाद दो आरोपियों को मलदहिया क्षेत्र से दबोचा गया। मुख्य सूत्रधार योग शिक्षक राजकुमार बाजपेयी को जवाहर तिराहा रोडवेज के पास से गिरफ्तार किया गया।
फिलहाल पुलिस तीनों आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह ने शहर में और कितने लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाया है।
वाराणसी। डिजिटल युग में अपराध (Cyber Fraud) का एक ऐसा खौफनाक चेहरा सामने आया है जिसने पुलिस और जनता दोनों को झकझोर कर रख दिया है। वाराणसी के रोहनिया थाना क्षेत्र …
वाराणसी। डिजिटल युग में अपराध (Cyber Fraud) का एक ऐसा खौफनाक चेहरा सामने आया है जिसने पुलिस और जनता दोनों को झकझोर कर रख दिया है। वाराणसी के रोहनिया थाना क्षेत्र में एक किराना व्यवसायी, जितेंद्र पटेल की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी गई ताकि उनके बैंक खाते से ₹26 लाख लूटे जा सकें। पूर्वांचल के इतिहास में साइबर अपराध के लिए दी गई इस तरह की यह पहली लाइव मर्डर की वारदात है। हालांकि, पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए अत्याधुनिक सर्विलांस और लगभग 2,000 सीसीटीवी कैमरों की मदद से इस पूरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझा ली है।
पकड़े गए आरोपियों की उम्र महज 19 से 23 वर्ष के बीच है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि इन युवाओं ने ‘जामताड़ा’ वेब सीरीज देखकर कम समय में अमीर बनने का शॉर्टकट अपनाया था। गिरोह का मास्टरमाइंड आयुष पटेल पहले एक डिजिटल पेमेंट कंपनी (पेटीएम) में एजेंट के रूप में काम करता था। लगभग छह महीने पहले, जितेंद्र पटेल की दुकान पर केवाईसी (KYC) अपडेट करने के बहाने आयुष ने उनके खाते में ₹26 लाख की बड़ी रकम देख ली थी। वहीं से उसने अपने साथियों गियांशु, सुशील, अमन और मनीष के साथ मिलकर इस खूनी साजिश का ताना-बाना बुना।
बीती 8 जून की रात, जब जितेंद्र अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे, तब घात लगाए बैठे बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। अपराधियों का इरादा उनका मोबाइल फोन छीनकर पूरी रकम ऑनलाइन ट्रांसफर करने का था। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी पुलिस को गुमराह करने के लिए ग्रामीण रास्तों से होते हुए फरार हो गए।
पुलिस ने जांच के लिए 50 जवानों की एक विशेष टीम गठित की। सीसीटीवी फुटेज खंगालते समय पुलिस को एक संदिग्ध ऑरा कार और रोनिन बाइक दिखाई दी। कार के नंबर के आधार पर जब पहली गिरफ्तारी हुई, तो कड़ियां जुड़ती चली गईं। रविवार की रात रोहनिया पुलिस और एसओजी की संयुक्त कार्रवाई में हुई एक मुठभेड़ के बाद सभी पांचों आरोपियों को दबोच लिया गया, जिसमें दो आरोपी पैर में गोली लगने से घायल भी हुए।
यह गिरोह मुख्य रूप से उन बुजुर्ग दुकानदारों को अपना शिकार बनाता था जो तकनीकी रूप से ज्यादा समझदार नहीं होते थे। केवाईसी के बहाने उनके फोन लेकर ये शातिर अलग-अलग ऐप से लोन पास करवा लेते थे और बाद में उस पैसे से सर्राफा दुकानों पर ऑनलाइन भुगतान कर सोना खरीद लेते थे। पुलिस ने इनके पास से ₹1.78 लाख नकद, हथियार, 20 मोबाइल फोन, एटीएम मशीनें और कई सिम कार्ड बरामद किए हैं। इस बड़ी कामयाबी पर पुलिस कमिश्नर ने जांच टीम को ₹1 लाख का इनाम देने की घोषणा की है।
बलिया: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में धार्मिक स्थलों और रिहायशी मकानों में सिलसिलेवार चोरियां कर खौफ पैदा करने वाले ‘कन्हैया राम गिरोह’ पर पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी …
बलिया: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में धार्मिक स्थलों और रिहायशी मकानों में सिलसिलेवार चोरियां कर खौफ पैदा करने वाले ‘कन्हैया राम गिरोह’ पर पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। जिला मजिस्ट्रेट से हरी झंडी मिलने (गैंगचार्ट मंजूर होने) के बाद, नगरा थाना पुलिस ने इस संगठित गिरोह के सरगना समेत कुल आठ सदस्यों के खिलाफ उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (गैंगस्टर एक्ट) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले की कमान अब पुलिस उपाधीक्षक रजनीश कुमार यादव संभाल रहे हैं।
दहशत का पर्याय बने गिरोह के इन सदस्यों पर हुई कार्रवाई
थानाध्यक्ष संजय मिश्र के मुताबिक, इस शातिर गिरोह की कमान भीमपुरा थाना क्षेत्र के चरउवा निवासी कन्हैया राम (50 वर्ष) के हाथों में है। इसके अलावा गिरोह में शामिल अन्य सात मुख्य गुर्गों को भी इस मामले में नामजद किया गया है:
उमेश कुमार राजभर (45 वर्ष)
बबूल राम (31 वर्ष)
बलवंत कुमार (32 वर्ष)
जगदीश ठाकुर उर्फ गुड्डू (37 वर्ष)
संजय राम उर्फ डॉक्टर (45 वर्ष)
अवधेश वर्मा (48 वर्ष)
चंदन राम (34 वर्ष)
गवाही देने से भी कतराते थे लोग
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, यह गिरोह काफी समय से एक सिंडिकेट की तरह काम कर रहा था। इनका मुख्य काम सूने घरों और आस्था के केंद्रों (मंदिरों) में रेकी कर बड़ी चोरियां व नकबजनी की वारदातों को अंजाम देना था। इस अवैध काम से गिरोह ने मोटी काली कमाई जमा कर ली थी। इलाके में इस गैंग का इस कदर रसूख और डर था कि कोई भी आम नागरिक इनके खिलाफ आवाज उठाने या अदालतों में गवाही देने का साहस नहीं जुटा पाता था। इसी खौफ को तोड़ने के लिए पुलिस ने पुख्ता सबूत जुटाकर इनका गैंगचार्ट तैयार किया था।
दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच मचाया था कोहराम इस गिरोह ने मलप हरसेनपुर गांव के एक घर को निशाना बनाने के साथ-साथ सुपापाली और छाता सेमरी के प्रसिद्ध मंदिरों में भी हाथ साफ किया था। बैक-टू-बैक हुई इन चोरियों के बाद पुलिस टीमों ने कार्रवाई करते हुए मार्च और अप्रैल 2026 में इन सभी 8 आरोपियों को दबोचकर सलाखों के पीछे भेज दिया था।
संपत्ति भी हो सकती है कुर्क
फिलहाल सभी आरोपी जेल में बंद हैं, लेकिन गैंगस्टर एक्ट लगने के बाद अब इनकी मुश्किलें और ज्यादा बढ़ने वाली हैं। इस कानून के तहत आने वाले समय में पुलिस अपराध के जरिए अर्जित की गई इनकी अवैध संपत्तियों को भी जब्त (कुर्क) करने की तैयारी कर सकती है। स्थानीय पुलिस प्रशासन का साफ कहना है कि जिले में सक्रिय किसी भी संगठित क्रिमिनल सिंडिकेट को बख्शा नहीं जाएगा और आगे भी ऐसी ही सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
वाराणसी। देश के अलग-अलग हिस्सों में हाल ही में हुए कुछ चर्चित हत्याकांडों (जैसे इंदौर का सोनम-राजा मामला या पुणे का सिया-केतन कांड) ने पूरे समाज को हिलाकर रख दिया था। …
वाराणसी। देश के अलग-अलग हिस्सों में हाल ही में हुए कुछ चर्चित हत्याकांडों (जैसे इंदौर का सोनम-राजा मामला या पुणे का सिया-केतन कांड) ने पूरे समाज को हिलाकर रख दिया था। ठीक इसी तरह की खौफनाक और दिल दहला देने वाली वारदातें उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भी सामने आ चुकी हैं। यहाँ अवैध संबंधों और प्यार में रुकावट बनने वाले प्रेमियों, पतियों और यहाँ तक कि मासूम बच्चों की बलि चढ़ा दी गई। आइए डालते हैं वाराणसी के कुछ ऐसे ही प्रमुख मामलों पर एक नजर:
1. जाफर मर्डर केस (साल 2009)
वाराणसी के भेलूपुर इलाके में साल 2009 में जाफर नाम के व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। जब पुलिस ने इस मामले की गहराई से तफ्तीश की, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। जाफर की पत्नी अफसाना का अपने प्रेमी इश्तियाक के साथ पहले से प्रेम संबंध था। शादी के बाद भी दोनों का अफेयर जारी रहा और उन्होंने मिलकर जाफर को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। अफसाना ने धोखे से अपने पति के खाने में जहर मिलाकर उसकी हत्या कर दी। इस जुर्म के खुलासे के बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
2. देवांश/दिव्यांशु हत्याकांड (जुलाई 2023)
फतेहगढ़ (फर्रूखाबाद) का रहने वाला देवांश अचानक वाराणसी के सोनारपुरा स्थित एक गेस्ट हाउस से गायब हो गया था। भेलूपुर पुलिस की जांच में यह बात सामने आई कि बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) में पढ़ने वाली कानपुर की छात्रा अनुष्का तिवारी के साथ उसका करीब चार साल से अफेयर था। हालांकि, बाद में अनुष्का का दिल राहुल सेठ नाम के दूसरे युवक पर आ गया। अपने पुराने प्रेमी देवांश से पीछा छुड़ाने के लिए अनुष्का ने राहुल और शादाब नाम के युवकों के साथ मिलकर एक खौफनाक साजिश रची। उसने देवांश को मिलने के बहाने फतेहगढ़ से वाराणसी बुलाया और फिर चंदौली के एक सुनसान इलाके में ले जाकर उसकी हत्या करवा दी।
3. दिलजीत हत्याकांड (मार्च 2025)
पिछले साल मार्च 2025 में होली के त्योहार के दिन औसानगंज (जैतपुरा) इलाके में दिलजीत नाम के युवक की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने जब मामले की कड़ियां जोड़ीं तो पता चला कि दिलजीत की प्रेमिका सरस्वती का किसी अन्य युवक (राजकुमार) से प्रेम संबंध शुरू हो गया था। सरस्वती को लगा कि उसका पुराना प्रेमी दिलजीत उसके नए रिश्ते में अड़चन बन सकता है। इसी वजह से उसने राजकुमार के साथ मिलकर साजिश रची, जिसके बाद राजकुमार ने दिलजीत को गोली मार दी। जैतपुरा पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
रिश्तों का कत्ल: जब अपनों पर ही चला खंजर
वारदात की ये कड़ियां सिर्फ प्रेमियों या पतियों तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि अवैध संबंधों को छुपाने के लिए सगे रिश्तों का भी खून बहाया गया:
बेटी ने कराई पिता की हत्या: साल 2021 में चोलापुर क्षेत्र के एक व्यापारी राजेश जायसवाल की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस जांच में मृत व्यापारी की सगी बेटी और उसके प्रेमी का हाथ होना पाया गया, जिन्होंने शूटरों की मदद से इस वारदात को अंजाम दिलवाया था।
मां बनी कातिल: साल 2025 में रामनगर इलाके में एक बेहद शर्मनाक वाकया सामने आया, जहां एक महिला ने अपने अवैध संबंधों के राज को छुपाने के लिए अपने ही 10 साल के मासूम बेटे की हत्या करवा दी।
त्रिकोण प्रेम में आंगनबाड़ी कार्यकत्री की मौत: शिवपुर के लक्ष्मणपुर में एक युवक का एक आंगनबाड़ी कार्यकत्री के साथ प्रेम संबंध था। जब उस युवक की शादी किसी दूसरी लड़की से हो गई, तो उसने अपने इस राज को दबाने के लिए अपनी नई पत्नी के साथ मिलकर अपनी पूर्व प्रेमिका (आंगनबाड़ी कार्यकत्री) की हत्या कर दी।
वाराणसी। शहर में अवैध रूप से चल रहे हुक्का बारों के खिलाफ रविवार देर रात सिगरा पुलिस और एसओजी टीम ने संयुक्त अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो अलग-अलग …
वाराणसी। शहर में अवैध रूप से चल रहे हुक्का बारों के खिलाफ रविवार देर रात सिगरा पुलिस और एसओजी टीम ने संयुक्त अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो अलग-अलग हुक्का बारों पर छापेमारी कर 18 लोगों को हिरासत में लिया। मौके से बड़ी मात्रा में हुक्का, फ्लेवर टोबैको और अन्य नशीली सामग्री बरामद की गई।
जानकारी के मुताबिक पुलिस ने पहले सिपाहियों को ग्राहक बनाकर हुक्का बार में भेजा। पुष्टि होने के बाद टीम ने अचानक छापा मारते हुए पूरे नेटवर्क को पकड़ लिया। पुलिस की रेड पड़ते ही दोनों स्थानों पर अफरा-तफरी मच गई और कई लोग भागने का प्रयास करने लगे।
‘लव बाइट’ हुक्का बार में चल रहा था अवैध कारोबार
सिगरा थाना प्रभारी शिवाकांत मिश्र और एसओजी प्रभारी गौरव सिंह ने बताया कि डब्ल्यूएच स्मिथ स्कूल रोड स्थित पूर्विका होटल के बेसमेंट में “लव बाइट” नाम से हुक्का बार संचालित किया जा रहा था। यहां छापेमारी के दौरान संचालक अभिषेक सोनकर और अजीत बिंद पीछे के रास्ते से फरार हो गए।
मौके से विवेक नामक कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने यहां मौजूद 13 युवकों को हिरासत में लिया, जो कथित तौर पर नशे का सेवन कर रहे थे।
‘लॉर्ड ऑफ शीशा’ रेस्टोरेंट में भी छापा
इसके बाद पुलिस टीम ने आकाशवाणी तिराहे के पास स्थित “लॉर्ड ऑफ शीशा” रेस्टोरेंट में दबिश दी। जांच में यहां भी अवैध रूप से हुक्का बार संचालित होता मिला। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संचालक नितेश विश्वकर्मा उर्फ बाबू समेत दो कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया।
रेस्टोरेंट के अलग-अलग टेबलों पर हुक्का लगाया गया था और विभिन्न फ्लेवर परोसे जा रहे थे। पुलिस के पहुंचते ही वहां मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। कई युवक हुक्का छोड़कर बाहर भागने लगे, लेकिन पुलिसकर्मियों ने गेट बंद कर सभी को रोक लिया।
भारी मात्रा में फ्लेवर टोबैको और हुक्का बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस को कई हुक्के, फ्लेवर टोबैको और अन्य संदिग्ध नशीले पदार्थ मिले। सभी सामान को जब्त कर थाने भेज दिया गया है। हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ की जा रही है।
मौके पर पहुंचे एसीपी चेतगंज शुभम सिंह ने बताया कि दोनों हुक्का बारों से बड़ी मात्रा में नशीली सामग्री बरामद हुई है। अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वाराणसी। काशी का प्रसिद्ध नमो घाट रविवार तड़के अखाड़े में तब्दील हो गया। सोनभद्र से वाराणसी घूमने आए कुछ युवकों पर वहां तैनात निजी सुरक्षाकर्मियों (बाउंसर और गार्ड्स) ने लाठी-डंडों से …
वाराणसी।काशी का प्रसिद्ध नमो घाट रविवार तड़के अखाड़े में तब्दील हो गया। सोनभद्र से वाराणसी घूमने आए कुछ युवकों पर वहां तैनात निजी सुरक्षाकर्मियों (बाउंसर और गार्ड्स) ने लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया। इस बर्बर मारपीट में गंभीर रूप से घायल 17 वर्षीय किशोर राजेश जायसवाल उर्फ चिंटू की मौत हो गई, जबकि उसके अन्य साथियों को भी बेरहमी से पीटा गया। इस सनसनीखेज वारदात के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार सुरक्षाकर्मियों को हिरासत में ले लिया है।
दवा लेने आए थे वाराणसी, तड़के पहुंचे घाट
मूल रूप से सोनभद्र के रहने वाले पांच दोस्त अपने परिवार के एक सदस्य की दवा लेने और रिश्तेदार से मिलने वाराणसी आए थे। काम निपटाने के बाद, रविवार सुबह करीब साढ़े तीन बजे सभी युवक नमो घाट घूमने पहुंचे।
पीड़ित साथी बृजेश गुप्ता के अनुसार, गेट नंबर 2 के रैंप के पास तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया और बिना वजह गाली-गलौज करने लगे। जब राजेश उर्फ चिंटू ने गाली देने का विरोध किया, तो गार्ड्स भड़क गए और देख लेने की धमकी दी।
10-12 हमलावरों ने लाठी-डंडों से घेरा
विवाद बढ़ने पर युवक वहां से हटने लगे, लेकिन सुरक्षाकर्मी इतने पर ही नहीं रुके। आरोप है कि कुछ ही देर में मुख्य गार्ड अपने साथ 10 से 12 लाठी-डंडों से लैस अन्य बाउंसरों को लेकर आ धमका।
निर्दयता की हदें पार: हमलावरों ने आते ही सभी युवकों पर ताबड़तोड़ लाठियां बरसानी शुरू कर दीं। उन्होंने राजेश (चिंटू) को घेरकर इतनी बेरहमी से पीटा कि वह लहूलुहान होकर वहीं जमीन पर गिर गया। बीच-बचाव करने आए बृजेश और अन्य लड़कों को भी दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया, जिससे घाट पर अफरा-तफरी मच गई।
गार्ड्स के भागने के बाद साथी आनन-फानन में अचेत राजेश को लेकर मंडलीय अस्पताल पहुंचे। हालांकि, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
सीसीटीवी से खुलेगा राज, 4 गार्ड्स गिरफ्तार
वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। एसीपी (ACP) विजय प्रताप सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सुरक्षाकर्मियों और युवकों के बीच एंट्री को लेकर विवाद हुआ था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए घटना में शामिल 4 निजी गार्ड्स को हिरासत में ले लिया है और उनसे कड़ी पूछताछ की जा रही है।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि घाट पर लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज खंगालने से पूरी सच्चाई साफ हो जाएगी कि किस तरह सुरक्षा के नाम पर तैनात इन दरिंदों ने एक मासूम की जान ले ली। फिलहाल पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर आगे की विधिक कार्रवाई में जुटी है।
वाराणसी। जिले में रिश्तों को शर्मसार करने और मानवता को झकझोर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सारनाथ थाना पुलिस ने एक नाबालिग लड़की की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई …
वाराणसी। जिले में रिश्तों को शर्मसार करने और मानवता को झकझोर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सारनाथ थाना पुलिस ने एक नाबालिग लड़की की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए उसकी सगी मां सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। लालच में अंधी हो चुकी मां ने अपनी ही मासूम बेटी का सौदा चंद रुपयों और साड़ियों के लिए कर दिया। इसके बाद दो दरिंदों ने चार महीने तक नाबालिग को अपनी हवस का शिकार बनाया।
ट्रेन के सफर से शुरू हुआ खौफनाक खेल
इस दर्दनाक दास्तां की शुरुआत करीब चार महीने पहले एक ट्रेन यात्रा के दौरान हुई थी। पीड़िता और उसकी मां की मुलाकात ट्रेन में चंदौली निवासी लहरू यादव से हुई थी। लहरू की पत्नी की मौत हो चुकी थी, इसलिए उसने नाबालिग की मां के सामने उसे खरीदने का प्रस्ताव रखा। पैसों के लालच में आकर मां ने अपनी ममता का गला घोंट दिया और सौदा तय कर लिया। आरोपी लहरू यादव ने नाबालिग को खरीदने के बदले उसकी मां को 16 हजार रुपये नकद और 10 बनारसी साड़ियां दीं।
सौदा होने के बाद लहरू यादव नाबालिग को चंदौली ले गया। वहां समाज की नजरों से बचने के लिए उसने एक मंदिर में पीड़िता से जबरन शादी की। खुद को युवा दिखाने के जुनून में उसने दिल्ली जाकर हेयर ट्रांसप्लांट भी कराया। इसके बाद वह डरा-धमकाकर चार महीने तक दिन में कई-कई बार नाबालिग के साथ दुष्कर्म करता रहा। पूछताछ में सामने आया है कि लहरू ने हाल ही में अपनी जमीन 17 लाख रुपये में बेची थी, जिसे वह इस तरह की अय्याशियों में उड़ा रहा था।
एक नरक से छूटकर दूसरे दलदल में फंसी मासूम
चार महीने तक प्रताड़ित करने के बाद लहरू यादव पीड़िता से पीछा छुड़ाना चाहता था। वह उसे वाराणसी के मंडुआडीह स्टेशन पर लेकर आया। वहां उसने मदद के बहाने लड़की को रवि वर्मा नाम के एक ऑटो चालक को सौंप (बेच) दिया और खुद फरार हो गया।
सारनाथ थाना क्षेत्र के पहाड़िया (लाल क्वार्टर) का रहने वाला ऑटो चालक रवि वर्मा भी दरिंदा निकला। वह मदद का ढोंग रचकर नाबालिग को अपने कमरे पर ले गया और उसे बंधक बनाकर उसके साथ कुकर्म करने लगा।
सजग पड़ोसियों ने बचाया, पुलिस की बड़ी कार्रवाई
इस घिनौने कृत्य का भंडाफोड़ तब हुआ जब रवि के कमरे से नाबालिग की चीखें सुनाई दीं। पड़ोसियों ने घर में एक अनजान बच्ची को बंधक और रोते हुए देखा, तो उन्हें शक हुआ। स्थानीय नागरिकों ने बिना देर किए इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी।
सारनाथ थाना प्रभारी पंकज त्रिपाठी ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आरोपी रवि वर्मा को हिरासत में लेकर नाबालिग को मुक्त कराया। थाने आकर जब पीड़िता ने अपनी आपबीती सुनाई, तो पुलिसकर्मी भी सन्न रह गए।
गिरफ्तार आरोपियों में चंदौली के बलुआ का लहरू यादव मुख्य खरीदार था, इसके बाद झारखंड का रहने वाला रवि वर्मा जो कि दूसरा खरीदार था। इन दोनों ने ही बच्ची की मां से उसकी खरीदारी की और उससे महीनों दुष्कर्म किया।
पुलिस ने पीड़िता की लिखित तहरीर के आधार पर तत्काल मानव तस्करी और दुष्कर्म की संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। रवि से मिली जानकारी के आधार पर मुख्य आरोपी लहरू यादव और फिर कलयुगी मां को भी दबोच लिया गया। पुलिस ने तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया है, जबकि प्रशासनिक देखरेख में पीड़िता को सुरक्षित रखने के लिए वन स्टॉप सेंटर भेजा गया है।