नई दिल्ली/गाजियाबाद: सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति मिलने के बाद गाजियाबाद के हरीश राणा को दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया है। हरीश राणा पिछले 13 …
नई दिल्ली/गाजियाबाद: सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति मिलने के बाद गाजियाबाद के हरीश राणा को दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया है। हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से कोमा की स्थिति में बिस्तर पर पड़े हैं। अब एम्स के डॉक्टरों की टीम उनकी इच्छा मृत्यु की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
हरीश राणा के वकील मनीष जैन ने बताया कि शनिवार शाम करीब 5 बजे उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया। अस्पताल प्रशासन ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए 5 से 6 डॉक्टरों की एक विशेष टीम का गठन किया है। डॉक्टरों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया गोपनीय तरीके से की जाएगी और इससे जुड़ी ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी।
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बताया जा रहा है कि पैसिव यूथेनेशिया की प्रक्रिया के तहत हरीश राणा को दी जा रही लिक्विड डाइट और मल-मूत्र त्याग के लिए लगाई गई नलियों को हटाया जाएगा, ताकि उन्हें सामान्य शारीरिक अवस्था में लाया जा सके। इसके बाद वह जितने समय तक जीवित रहेंगे, उसी अवस्था में रहेंगे। मृत्यु के बाद उनका शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा।
परिजनों ने हरीश राणा के अंगदान की भी इच्छा जताई है। इसके लिए डॉक्टरों की टीम पहले उनके अंगों की जांच करेगी और यह तय करेगी कि कौन-कौन से अंग उपयोगी हो सकते हैं। इसके बाद अंगदान से जुड़ी आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
दरअसल, करीब 13 साल पहले चंडीगढ़ में पढ़ाई के दौरान हरीश राणा एक पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे, जिससे उनके मस्तिष्क में गंभीर चोट लग गई थी। तभी से वह अचेत अवस्था में हैं। उनके पिता अशोक राणा और मां पिछले 13 साल से उनकी सेवा कर रहे हैं।
लंबे समय तक हालत में सुधार न होने के कारण उनके पिता ने सुप्रीम कोर्ट में इच्छा मृत्यु की अनुमति के लिए याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दिए जाने के बाद अब एम्स में आगे की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
वाराणसी/लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस दरोगा भर्ती परीक्षा में ‘पंडित’ शब्द को लेकर उठे विवाद के बाद प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने मामले को गंभीरता से …
वाराणसी/लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस दरोगा भर्ती परीक्षा में ‘पंडित’ शब्द को लेकर उठे विवाद के बाद प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य के सभी भर्ती बोर्डों और आयोगों के अध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि भविष्य में किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र में ऐसे शब्दों का प्रयोग न किया जाए, जिससे किसी जाति, धर्म या समुदाय की भावनाएं आहत हों।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार सभी वर्गों के सम्मान और समानता के सिद्धांत पर कार्य करती है। इसलिए प्रश्नपत्र तैयार करते समय भाषा और शब्दों का चयन बेहद सावधानी और संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने भर्ती बोर्ड के अध्यक्षों से कहा कि किसी भी व्यक्ति, जाति या पंथ की गरिमा के खिलाफ कोई भी अमर्यादित टिप्पणी प्रश्नपत्र में शामिल नहीं होनी चाहिए।
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पेपर सेटर्स और एजेंसियों पर भी सख्ती
मुख्यमंत्री ने केवल भर्ती बोर्डों को ही नहीं, बल्कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाली बाहरी एजेंसियों और पेपर सेटर्स के लिए भी कड़े नियम लागू करने के निर्देश दिए हैं। अब इन एजेंसियों को स्पष्ट रूप से बताया जाएगा कि वे किसी भी प्रकार के विवादित या जातिसूचक शब्दों का उपयोग न करें। यदि ऐसा पाया गया तो संबंधित एजेंसी या पेपर सेटर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
MoU में जोड़ी जाएगी नई शर्त
प्रदेश सरकार ने यह भी तय किया है कि अब प्रश्नपत्र तैयार करने वाली एजेंसियों के साथ होने वाले अनुबंध (MoU) में नई शर्त जोड़ी जाएगी। इसके तहत एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रश्नपत्र में किसी की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली सामग्री शामिल न हो। यदि इस शर्त का उल्लंघन हुआ तो एजेंसी पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा, कानूनी कार्रवाई की जाएगी और बार-बार गलती करने वालों को ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।
कैसे शुरू हुआ विवाद
दरअसल, उत्तर प्रदेश पुलिस दारोगा भर्ती परीक्षा के पहले दिन हिंदी प्रश्नपत्र के एक सवाल के विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द दिए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। कई लोगों ने इसे अनुचित बताते हुए विरोध जताया। मामला बढ़ने के बाद प्रदेश के उपमुख्यमंत्री Brijesh Pathak ने भी इसे गलत बताते हुए जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद भाजपा के कई विधायकों ने मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी।
पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार की छवि पारदर्शी और निष्पक्ष प्रशासन की है और किसी भी अधिकारी की लापरवाही से इसे नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाएगा। उन्होंने भर्ती बोर्डों को प्रश्नपत्रों की स्क्रीनिंग प्रक्रिया और मजबूत करने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद दोबारा न हों और अभ्यर्थियों का भरोसा कायम रहे।
नई दिल्ली: समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर देश में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने …
नई दिल्ली: समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर देश में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। इसी बीच AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने UCC को लेकर केंद्र सरकार और इसके समर्थकों पर निशाना साधा है।
ओवैसी ने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड के नाम पर हिंदू कानून मुसलमानों पर लागू नहीं किए जा सकते। उनका कहना है कि इस्लाम में विवाह एक धार्मिक संस्कार नहीं बल्कि एक कॉन्ट्रैक्ट (अनुबंध) की तरह होता है।
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इस्लाम में निकाह एक अनुबंध
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि UCC की चर्चा फिर से तेज हो गई है, लेकिन लोगों को यह समझना होगा कि इस्लाम में शादी जन्म-जन्म का बंधन नहीं बल्कि एक समझौता है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज में निकाह को एक कानूनी और सामाजिक अनुबंध के रूप में देखा जाता है।
ओवैसी ने दावा किया कि हिंदू कानूनों में कुछ ऐसे प्रावधान हैं जिन्हें मुसलमानों पर लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अदालतों में कई बार यह कहा गया है कि यदि पत्नी सास-ससुर की देखभाल नहीं करती तो इसे क्रूरता माना जा सकता है, जबकि इस्लाम में ऐसी कोई बाध्यता नहीं है।
उनके अनुसार इस्लाम में माता-पिता की जिम्मेदारी मुख्य रूप से बेटे की होती है।
आदिवासियों पर भी उठाया सवाल
AIMIM नेता ने यह भी सवाल उठाया कि क्या हिंदू मैरिज एक्ट आदिवासी समुदायों पर लागू होगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न समुदायों की अलग-अलग परंपराएं और धार्मिक मान्यताएं हैं, इसलिए एक समान कानून लागू करना आसान नहीं है।
जेंडर जस्टिस पर सरकार को घेरा
ओवैसी ने कहा कि जो लोग जेंडर जस्टिस की बात करते हैं, उन्हें पहले मुस्लिम महिलाओं की शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मुद्दों पर सरकार और समाज की संवेदनशीलता दिखाई नहीं देती, लेकिन UCC की बहस को बार-बार आगे लाया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बढ़ी बहस
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि देश में समान नागरिक संहिता लागू करने का समय आ गया है। अदालत ने यह भी कहा कि इस विषय पर अंतिम निर्णय लेना विधायिका यानी संसद का अधिकार है।
यह टिप्पणी 1937 के शरीयत कानून के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान की गई थी, जिसमें कहा गया है कि कुछ प्रावधान मुस्लिम महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण हैं।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा के पहले दिन पूछे गए एक सवाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रश्न के उत्तर विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द शामिल होने …
लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा के पहले दिन पूछे गए एक सवाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रश्न के उत्तर विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द शामिल होने पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। कई लोगों ने इसे एक जाति से जोड़कर आपत्ति जताई है, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया।
दरअसल, सामान्य हिंदी खंड में एक प्रश्न पूछा गया था— “अवसर के अनुसार बदल जाने वाले के लिए एक शब्द लिखिए।” इसके लिए चार विकल्प दिए गए थे: सदाचारी, पंडित, अवसरवादी और निष्कपट। इनमें ‘पंडित’ शब्द को विकल्प के रूप में शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई जा रही है। परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र का यह हिस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
पहले दिन 5.31 लाख अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा
उप निरीक्षक नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 के तहत आयोजित परीक्षा में पहले दिन 5,31,765 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। परीक्षा प्रदेश के विभिन्न केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कराई गई।
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पेपर लीक की अफवाह फैलाने पर कार्रवाई
भर्ती परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए एसटीएफ और अन्य एजेंसियां सोशल मीडिया की लगातार निगरानी कर रही हैं। इसी दौरान टेलीग्राम पर फर्जी प्रश्नपत्र भेजकर अभ्यर्थियों से ठगी करने के आरोप में लखनऊ में सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
एसटीएफ ने इस मामले में आगरा के न्यू आगरा थाना क्षेत्र की इंजीनियर्स कॉलोनी से आयुष बघेल नामक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह परीक्षा का पेपर लीक होने की अफवाह फैलाकर टेलीग्राम चैनलों के माध्यम से फर्जी प्रश्नपत्र भेजता था और अभ्यर्थियों से पैसे वसूल रहा था। मामले में जांच जारी है।
डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने जताई आपत्ति
इस पूरे मामले पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी प्रश्न या विकल्प से किसी समाज या वर्ग की गरिमा को ठेस पहुंचती है, तो यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी जाति, समुदाय या परंपरा के प्रति अपमानजनक शब्दों या संदर्भों को किसी भी परीक्षा में स्थान नहीं मिलना चाहिए। डिप्टी सीएम ने मामले की तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं और कहा है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या त्रुटि पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ब्रजेश पाठक ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार सभी समाजों के सम्मान, समानता और संवेदनशीलता के सिद्धांत पर काम करती है और प्रदेश के हर नागरिक की गरिमा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
जांच और कार्रवाई की मांग
भाजपा नेता अभिजात मिश्रा ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह का प्रश्न अत्यंत संवेदनशील है और इससे समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने प्रश्नपत्र तैयार करने वाली समिति की जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल विवादित प्रश्न को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है और प्रशासन द्वारा पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है।
प्रयागराज: महाकुंभ 2025 के दौरान माला-फूल बेचते हुए सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरने वाली ‘नीली आंखों वाली मोनालिसा’ एक बार फिर चर्चा में हैं। खबर है कि मोनालिसा भोसले ने मुस्लिम …
प्रयागराज: महाकुंभ 2025 के दौरान माला-फूल बेचते हुए सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरने वाली ‘नीली आंखों वाली मोनालिसा’ एक बार फिर चर्चा में हैं। खबर है कि मोनालिसा भोसले ने मुस्लिम युवक फरमान खान के साथ शादी कर ली है। बताया जा रहा है कि दोनों ने केरल में विवाह किया, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।
वायरल तस्वीरों में मोनालिसा लाल रंग के शादी के जोड़े में मंदिर में शादी करती दिखाई दे रही हैं। उनके साथ फरमान खान भी मौजूद हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार इस शादी को लेकर मोनालिसा के परिवार ने आपत्ति जताई है।
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परिवार से विवाद के बाद मांगी पुलिस सुरक्षा
मोनालिसा ने पुलिस को दी गई तहरीर में कहा है कि शादी के बाद उन्हें और उनके पति को अलग करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई है कि दोनों की जान को खतरा हो सकता है। इसी वजह से उन्होंने पुलिस से सुरक्षा की मांग की है।
पुलिस का कहना है कि मोनालिसा बालिग हैं और उन्हें अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का पूरा अधिकार है। फिलहाल पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए दोनों को सुरक्षा उपलब्ध कराई है।
फिल्म डायरेक्टर ने लगाया ‘लव जिहाद’ का आरोप
इस मामले में फिल्म निर्देशक सनोज मिश्रा ने आरोप लगाया है कि मोनालिसा ‘लव जिहाद’ का शिकार हुई हैं। उनका कहना है कि उन्होंने मोनालिसा के लिए एक शिक्षक रखा था, जिसने उनकी मुलाकात फरमान खान से करवाई। इसके बाद दोनों के बीच संबंध बने और यह शादी हुई।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों व दावों की पुष्टि की जा रही है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पेट्रोल-डीजल और गैस की किल्लत को लेकर फैल रही अफवाहों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस …
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पेट्रोल-डीजल और गैस की किल्लत को लेकर फैल रही अफवाहों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस कप्तानों (SP) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अफवाह फैलाने वालों और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि पेट्रोल, डीजल और गैस सिलेंडर की कालाबाजारी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से गलत जानकारी फैलाने वालों पर भी कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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सीएम के निर्देश के बाद पुलिस मुख्यालय से लेकर जिला स्तर तक सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी बढ़ा दी गई है। अफवाह फैलाने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सभी जिलों की पुलिस को पेट्रोल पंपों के आसपास निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था या अफवाह से बचा जा सके।
इसके अलावा जिला प्रशासन और आपूर्ति विभाग को गैस एजेंसियों और दुकानों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। गैस सिलेंडरों का अवैध भंडारण करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम लोगों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी और पेट्रोल, डीजल व गैस की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी रहेगी।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं पर अब सरकार का सख्त नियंत्रण होगा। यात्रियों की सुरक्षा और किराये में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार ने बड़ा फैसला …
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं पर अब सरकार का सख्त नियंत्रण होगा। यात्रियों की सुरक्षा और किराये में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए नई एग्रीगेटर पॉलिसी 2026 को मंजूरी दे दी है। इस नीति के तहत अब Ola, Uber और Rapido जैसी कंपनियों को प्रदेश में सेवाएं देने के लिए अनिवार्य रूप से राज्य सरकार से रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस लेना होगा।
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि अब तक ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं पर सरकार का सीधा नियंत्रण सीमित था। इसलिए केंद्र सरकार की मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइन्स 2025 के आधार पर प्रदेश सरकार ने अपने नए नियम तैयार किए हैं, ताकि यात्रियों को सुरक्षित और पारदर्शी सेवा मिल सके।
ड्राइवरों का वेरिफिकेशन अनिवार्य
नई नीति के अनुसार सभी कैब और बाइक टैक्सी ड्राइवरों का पुलिस वेरिफिकेशन और मेडिकल टेस्ट अनिवार्य होगा। जांच पूरी होने के बाद ही ड्राइवर ऐप पर सक्रिय हो सकेंगे। इससे यात्रियों, खासकर महिलाओं की सुरक्षा को बेहतर बनाया जा सकेगा।
किराये पर लगेगी लगाम
सरकार अब इन कंपनियों के मनमाने किराये और सर्ज प्राइसिंग (Surge Pricing) पर नियंत्रण करेगी। पीक ऑवर्स के दौरान बढ़ाए जाने वाले किराये की अधिकतम सीमा तय की जाएगी, जिससे यात्रियों को राहत मिल सके।
सुरक्षा के लिए अनिवार्य फीचर्स
सभी कैब और बाइक टैक्सी वाहनों में पैनिक बटन और GPS ट्रैकिंग सिस्टम अनिवार्य होगा। इन सुविधाओं को सीधे कंट्रोल रूम से जोड़ा जाएगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।
शिकायतों के लिए ऑनलाइन सिस्टम
कंपनियों को एक प्रभावी ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली (Grievance Redressal System) बनानी होगी, जिससे यात्रियों और ड्राइवरों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।
ड्राइवरों को भी मिलेगा फायदा
नई नीति में ड्राइवरों के हितों का भी ध्यान रखा गया है। कंपनियों को अपने ड्राइवरों के लिए 5 लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस और 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस देना अनिवार्य किया जा सकता है। इसके अलावा राइड कैंसिलेशन पर लगने वाली पेनल्टी के नियम अब ड्राइवर और यात्री दोनों के लिए समान होंगे।
नोट: सरकार के अनुसार यह नियम अगले कुछ हफ्तों में पूरे प्रदेश में लागू कर दिए जाएंगे। यदि कोई कंपनी इन नियमों का उल्लंघन करती है तो उस पर भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वाराणसी/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां को लेकर की गई कथित विवादित टिप्पणी के बाद प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। बिहार के मौलाना …
वाराणसी/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां को लेकर की गई कथित विवादित टिप्पणी के बाद प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। बिहार के मौलाना अब्दुल्ला सलीम के बयान को लेकर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इस मामले में बलरामपुर में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश के करीब 83 थानों में भी शिकायतें दी गई हैं।
बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई बलरामपुर में भाजपा जिलाध्यक्ष की तहरीर पर की गई। वहीं कई हिंदू संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, भाजपा पदाधिकारियों और छात्रों ने पुलिस प्रशासन से आरोपी मौलाना की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ बयान
जानकारी के अनुसार, मौलाना अब्दुल्ला सलीम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। वीडियो सामने आने के बाद यह मुद्दा तेजी से चर्चा में आ गया और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
वायरल वीडियो के बाद कई संगठनों और लोगों ने इसे मुख्यमंत्री की मां का अपमान बताते हुए कड़ा विरोध जताया और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की।
लखनऊ में विरोध प्रदर्शन, लगाए गए पोस्टर
मामला बढ़ने के बाद राजधानी लखनऊ में भी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। शहर के हजरतगंज इलाके में कई स्थानों पर विरोध स्वरूप होर्डिंग लगाए गए, जिनमें “योगी जी की मां का अपमान नहीं सहेगा हिंदू समाज” जैसे संदेश लिखे गए थे।
7 मार्च को अटल चौक पर युवाओं ने एकत्र होकर मौलाना अब्दुल्ला सलीम के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान नारेबाजी की गई और उनका पुतला भी फूंका गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से आरोपी की जल्द गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
पुलिस कर रही मामले की जांच
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में दर्ज शिकायतों और वायरल वीडियो की जांच की जा रही है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वाराणसी। टी20 वर्ल्ड कप में भारतीय क्रिकेट टीम की जीत के बाद काशी के बुनकरों ने अपनी खुशी खास अंदाज में जाहिर की है। वाराणसी के बुनकरों ने टीम इंडिया के …
वाराणसी। टी20 वर्ल्ड कप में भारतीय क्रिकेट टीम की जीत के बाद काशी के बुनकरों ने अपनी खुशी खास अंदाज में जाहिर की है। वाराणसी के बुनकरों ने टीम इंडिया के खिलाड़ियों के लिए विशेष बनारसी साड़ियां तैयार कर उन्हें कूरियर के जरिए भेजा है।
इन साड़ियों को तैयार करने में करीब एक महीने का समय लगा। खास बात यह है कि ये साड़ियां पूरी तरह हैंडलूम पर बनाई गई हैं और इनमें चांदी की जरी का काम किया गया है। काशी के बुनकर सर्वेश ने बताया कि इन साड़ियों की लागत उन्होंने खुद वहन की है। एक साड़ी की कीमत करीब 20 हजार रुपये के आसपास है।
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सर्वेश के अनुसार, साड़ियों के डिजाइन में भारत द्वारा अब तक जीते गए सभी वर्ल्ड कप की झलक दिखाई गई है। खास बात यह भी है कि इसमें टी20 वर्ल्ड कप 2026 को भी दर्शाया गया है, जो भारतीय टीम की जीत की उम्मीद को दिखाता है।
रेशम से बनी इन खास साड़ियों को पैक करके भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों को कूरियर किया गया। हर साड़ी के पैकिंग बॉक्स पर संबंधित खिलाड़ी और उनकी पत्नियों की तस्वीर लगाई गई है, जबकि अविवाहित खिलाड़ियों के बॉक्स पर उनकी फोटो लगाई गई है।
बुनकरों का कहना है कि देश के लिए खेलने वाले खिलाड़ियों के सामने इन पैसों की कोई कीमत नहीं है। भारतीय टीम की जीत से उनकी खुशी और बढ़ गई है और उन्हें गर्व है कि उन्होंने खिलाड़ियों के लिए यह खास तोहफा तैयार किया।
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए टी-20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम कर लिया है। फाइनल मुकाबले में भारत ने न्यूज़ीलैंड को 96 रन के बड़े …
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए टी-20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम कर लिया है। फाइनल मुकाबले में भारत ने न्यूज़ीलैंड को 96 रन के बड़े अंतर से हराकर इतिहास रच दिया। इस जीत के साथ ही टीम इंडिया ने क्रिकेट जगत में अपनी ताकत एक बार फिर साबित कर दी।
फाइनल मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत के बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया और बड़ा स्कोर खड़ा किया। भारतीय बल्लेबाजों ने आक्रामक अंदाज में रन बनाते हुए न्यूजीलैंड के सामने मजबूत लक्ष्य रखा।
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लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी। भारत के गेंदबाजों ने शुरुआत से ही दबाव बनाए रखा और नियमित अंतराल पर विकेट लेते हुए न्यूजीलैंड की पूरी टीम को जल्दी समेट दिया। परिणामस्वरूप भारत ने मुकाबला 96 रन के बड़े अंतर से जीत लिया।
इस ऐतिहासिक जीत के बाद पूरे देश में खुशी और उत्साह का माहौल है। शहरों से लेकर गांवों तक लोग सड़कों पर उतरकर तिरंगा लहराते हुए टीम इंडिया की जीत का जश्न मना रहे हैं। क्रिकेट प्रेमी पटाखे जलाकर और मिठाइयां बांटकर अपनी खुशी जाहिर कर रहे हैं।
टी-20 वर्ल्ड कप जीत के साथ ही भारतीय टीम ने एक बार फिर करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीत लिया है और देश का नाम विश्व क्रिकेट में गौरवान्वित किया है।