मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय हलचल के बीच भारत में LPG सिलेंडर की सप्लाई को लेकर कई तरह की बातें हो रही हैं। कई ग्राहकों को गैस बुक करने के बाद DAC (Delivery Authentication Code) मिलने में देरी हो रही है, जिससे ‘पैनिक बुकिंग’ का माहौल बन गया है। आइए समझते हैं कि आखिर माजरा क्या है और आपको क्या करना चाहिए।
क्यों अटक रहा है आपका DAC नंबर?
गैस (LPG) कंपनियों के अनुसार, सप्लाई की कोई कमी नहीं है। समस्या का असली कारण तकनीकी है:
- सर्वर पर लोड: अंतरराष्ट्रीय तनाव की खबरों के बाद अचानक बुकिंग की संख्या कई गुना बढ़ गई है।
- सिस्टम बैकलॉग: भारी ट्रैफिक की वजह से इनवॉइस जेनरेट होने और कोड आने में 3 से 4 दिन का समय लग रहा है।
- सुरक्षा का पेच: DAC एक अनिवार्य OTP है जिसे फर्जी डिलीवरी रोकने के लिए बनाया गया है, इसलिए इसके बिना सिलेंडर मिलना संभव नहीं है।
बुकिंग का ‘स्मार्ट’ तरीका: कब करें ऑर्डर?
अगर आप चाहते हैं कि आपकी बुकिंग बिना किसी तकनीकी रुकावट के हो जाए, तो समय का चुनाव सही करें:
- पीक आवर्स से बचें: सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे के बीच सर्वर पर सबसे ज्यादा दबाव रहता है।
- बेस्ट टाइम: गैस कंपनियों की सलाह है कि शाम 6 बजे के बाद या देर रात बुकिंग करें। इस समय ट्रैफिक कम होने से सिस्टम तेजी से प्रोसेस करता है।
नया ’25 दिन’ वाला नियम: क्या है हकीकत?
सरकार ने बेवजह की जमाखोरी और पैनिक बुकिंग को रोकने के लिए एक कड़ा नियम लागू किया है:
नियम: आप अपनी पिछली डिलीवरी के 25 दिन पूरे होने के बाद ही अगला सिलेंडर बुक कर पाएंगे। इसका उद्देश्य बाजार में गैस की उपलब्धता को संतुलित रखना और जरूरतमंदों तक समय पर सिलेंडर पहुँचाना है।
उपभोक्ताओं के लिए जरूरी गाइडलाइंस
- पैनिक बुकिंग न करें: देश में गैस (LPG) का पर्याप्त स्टॉक है, इसलिए डर कर एडवांस बुकिंग न करें।
- धैर्य रखें: अगर बुकिंग के तुरंत बाद कोड नहीं आता, तो बार-बार प्रयास करने के बजाय 1-2 दिन इंतज़ार करें।
- स्टेटस चेक करें: अपनी गैस एजेंसी के ऐप या वेबसाइट पर जाकर बुकिंग स्टेटस ट्रैक करते रहें।
- अफवाहों से बचें: सप्लाई चैन पूरी तरह सामान्य है, केवल डिजिटल सिस्टम पर दबाव बढ़ा है।
