वाराणसी। ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष पूरे होने पर काशी ने सिंदूरी रंग में रंगकर सेना के शौर्य को सलामी दी। अस्सी घाट से लेकर दशाश्वमेध और ललिता घाट पर होने गंगा आरती में सेना के साहस और शौर्य को नमन किया गया।
दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि द्वारा आयोजित मां गंगा की आरती को भारतीय सेना के अदम्य साहस और शौर्य को समर्पित किया गया। घाट पर मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने एक स्वर में भारत माता की जय और ”वंदे मातरम्” के उद्घोष से आसमान गुंजायमान कर दिया।

आरती की शुरुआत से पूर्व पूरा घाट दीपों की रोशनी से जगमगा उठा। शंखनाद और डमरुओं की थाप ने वातावरण में एक अद्भुत ऊर्जा का संचार किया। गंगा सेवा निधि के अर्चकों ने विशेष रूप से भारतीय सेना के जवानों के पराक्रम को नमन किया। इसके साथ ही, पिछले वर्ष जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुई दुखद आतंकी घटना में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों की आत्मा की शांति के लिए मां गंगा के आंचल में दीपदान किया गया।

इस दौरान घाट पर मौजूद लोगों ने बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना किया कि भारतीय सेना इसी प्रकार आतंकवाद के विरुद्ध अपना विजय अभियान जारी रखे और देश की सीमाओं को सुरक्षित बनाए रखे। गंगा सेवा निधि के कोषाध्यक्ष आशीष तिवारी और सचिव हनुमान यादव ने बताया कि यह आयोजन सेना के उन जांबाज सिपाहियों को एक श्रद्धांजलि है, जो अपनी जान की परवाह किए बिना देश की रक्षा में डटे रहते हैं। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और देश-विदेश से आए श्रद्धालु मौजूद रहे।

