• Banaras Now, Varanasi
  • May 29, 2026
Gaurav Tiwari Death

नई दिल्ली। भारत में भूत-प्रेत, आत्माओं और डरावनी घटनाओं की कहानियां हमेशा लोगों के बीच आकर्षण और डर का विषय रही हैं। लेकिन इन रहस्यमयी घटनाओं को अंधविश्वास नहीं बल्कि विज्ञान की नजर से देखने वाले एक शख्स ने देशभर में अलग पहचान बनाई। वह नाम था गौरव तिवारी का। उन्हें भारत का पहला चर्चित पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर और “घोस्ट हंटर” कहा जाता था।

गौरव तिवारी ने उन जगहों की जांच की जिन्हें लोग भूतिया मानते थे। उन्होंने हजारों मामलों में वैज्ञानिक उपकरणों और मनोवैज्ञानिक विश्लेषण के जरिए यह साबित करने की कोशिश की कि हर डरावनी घटना के पीछे कोई न कोई तार्किक कारण होता है। हालांकि, जिस व्यक्ति ने लोगों के डर को विज्ञान से समझाने का प्रयास किया, उसकी खुद की मौत आज भी रहस्य बनी हुई है।

दिल्ली में जन्म, पायलट बनने का सपना

गौरव तिवारी का जन्म वर्ष 1984 में दिल्ली में हुआ था। बचपन से ही वह बेहद जिज्ञासु स्वभाव के थे और नई चीजों को समझने में रुचि रखते थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एविएशन सेक्टर से करने का फैसला किया और कमर्शियल पायलट बनने के लिए सिंगापुर में ट्रेनिंग ली।

हालांकि, एविएशन की दुनिया में करियर सुरक्षित माना जाता था, लेकिन गौरव का मन इंसानी व्यवहार, रहस्यमयी घटनाओं और अनजानी शक्तियों को समझने में ज्यादा लगता था। यही रुचि धीरे-धीरे उन्हें पैरानॉर्मल रिसर्च की दुनिया में ले गई।

अमेरिका में हुई रहस्यमयी घटनाओं ने बदल दी जिंदगी

ट्रेनिंग के दौरान गौरव कुछ समय के लिए अमेरिका के फ्लोरिडा में भी रहे। वहीं उनके साथ कुछ ऐसी घटनाएं हुईं जिन्होंने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। गौरव ने कई इंटरव्यू में बताया था कि जिस घर में वह रहते थे, वहां उन्हें अजीब आवाजें सुनाई देती थीं। कभी किसी के चलने की आहट, कभी फुसफुसाहट, तो कभी एक छोटी बच्ची जैसी आकृति दिखाई देने का दावा किया गया।

इन घटनाओं ने उन्हें डरा जरूर दिया, लेकिन उन्होंने इन अनुभवों को अंधविश्वास मानने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से समझने का फैसला किया। यहीं से उनकी पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेशन की यात्रा शुरू हुई।

इंडियन पैरानॉर्मल सोसायटी की स्थापना

भारत लौटने के बाद गौरव तिवारी ने वर्ष 2009 में इंडियन पैरानॉर्मल सोसायटी (IPS) की स्थापना की। यह भारत की पहली संगठित संस्था मानी गई जो कथित भूतिया घटनाओं और आत्माओं से जुड़े मामलों की वैज्ञानिक तरीके से जांच करती थी।

गौरव का उद्देश्य लोगों में फैले अंधविश्वास और डर को खत्म करना था। उनकी टीम किसी भी जगह की जांच के दौरान आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करती थी। इनमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड मीटर, साउंड रिकॉर्डर, तापमान मापक और कैमरे शामिल थे।

वह हमेशा कहते थे कि हर डरावनी घटना के पीछे कोई वैज्ञानिक कारण हो सकता है, चाहे वह मानसिक तनाव हो, कम आवृत्ति की आवाजें, गैस रिसाव या वातावरण का असर।

6000 से ज्यादा ‘भूतिया’ जगहों की जांच

गौरव तिवारी और उनकी टीम ने देशभर में 6000 से अधिक जगहों की जांच की। इनमें राजस्थान का चर्चित भानगढ़ किला, मुंबई की मुकेश मिल्स, उत्तराखंड की लंबी देहर माइंस और कई पुराने बंगले, अस्पताल तथा स्कूल शामिल थे।

अधिकांश मामलों में गौरव ने दावा किया कि वहां किसी भूत या आत्मा का अस्तित्व नहीं मिला। उन्होंने कई घटनाओं को वैज्ञानिक तथ्यों से समझाया। उनके अनुसार कई बार कार्बन मोनोऑक्साइड गैस, मानसिक भ्रम, तनाव और वातावरण में मौजूद ध्वनियां लोगों को डरावना अनुभव कराती हैं।

टीवी शो से मिली देशभर में पहचान

गौरव तिवारी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान तब मिली जब वह टीवी शो “एमटीवी गर्ल्स नाइट आउट” में नजर आए। इस शो में वह कथित भूतिया इमारतों में रात बिताकर वहां की जांच करते थे। कैमरों की निगरानी में किए गए उनके प्रयोगों ने लोगों का ध्यान खींचा।

उनका शांत व्यवहार, तार्किक सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाता था। इसी वजह से मीडिया ने उन्हें भारत का पहला “मेनस्ट्रीम घोस्ट हंटर” कहना शुरू कर दिया।

अंधविश्वास के खिलाफ आवाज

हालांकि गौरव का नाम पैरानॉर्मल गतिविधियों से जुड़ा था, लेकिन वह हमेशा अंधविश्वास के खिलाफ बोलते थे। उनका मानना था कि डर ही सबसे बड़ा दुश्मन है। वह लोगों को समझाते थे कि किसी भी घटना को बिना जांचे-परखे अलौकिक मान लेना गलत है।

गौरव ने कई बार कहा था कि भूत-प्रेत से ज्यादा खतरनाक इंसान का डर और मानसिक दबाव होता है। यही वजह थी कि वह हर मामले को विज्ञान और मनोविज्ञान के आधार पर समझने की कोशिश करते थे।

मौत से पहले की आखिरी जांच

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौत से कुछ दिन पहले गौरव तिवारी ने पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी इलाके में एक केस की जांच की थी। बताया गया कि वहां रहने वाली एक महिला ने दावा किया था कि उसके ऊपर कई आत्माओं का साया है।

परिवार के अनुसार, उस जांच के बाद गौरव मानसिक रूप से परेशान रहने लगे थे। उन्होंने अपने करीबियों से कहा था कि उन्हें किसी “नकारात्मक शक्ति” का एहसास हो रहा है। हालांकि, इस दावे की कभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी।

रहस्यमयी मौत और अनसुलझे सवाल

7 जुलाई 2016 को गौरव तिवारी अपने द्वारका स्थित फ्लैट के बाथरूम में मृत पाए गए। उनकी गर्दन पर निशान मिले थे। पुलिस जांच में इसे आत्महत्या का मामला बताया गया।

हालांकि, उनके परिवार ने इस निष्कर्ष पर सवाल उठाए। परिवार का कहना था कि गौरव ने कोई सुसाइड नोट नहीं छोड़ा था और हाल ही में उनकी शादी हुई थी। उनके करीबी लोगों के अनुसार वह मानसिक रूप से कमजोर नहीं थे।

गौरव तिवारी की मौत के बाद सोशल मीडिया और इंटरनेट पर कई तरह की कहानियां सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे पैरानॉर्मल घटनाओं से जोड़ने की कोशिश की, जबकि कई विशेषज्ञों ने इसे मानसिक तनाव और निजी कारणों से जुड़ा मामला बताया।

आज भी कायम है रहस्य और चर्चा

गौरव तिवारी की जिंदगी और मौत आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। हाल ही में उनकी जिंदगी पर आधारित वेब सीरीज रिलीज होने के बाद एक बार फिर लोग उनके बारे में जानने लगे हैं।

उनकी कहानी केवल भूत-प्रेत की जांच तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह विज्ञान और अंधविश्वास के बीच संघर्ष की कहानी भी थी। गौरव तिवारी ने अपने काम के जरिए लोगों को यह सोचने पर मजबूर किया कि हर रहस्य के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक कारण जरूर हो सकता है।

भले ही उनकी मौत का सच आज तक पूरी तरह सामने न आया हो, लेकिन भारत में पैरानॉर्मल रिसर्च को नई पहचान दिलाने में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।

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