लखनऊ। अब प्रदेश में लगाए जाने वाले बिजली मीटर स्मार्ट होंगे, लेकिन उन्हें प्रीपेड रखना अनिवार्य नहीं होगा। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने पुराने नियमों में संशोधन करते हुए नई अधिसूचना जारी की है। इस फैसले से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
नियमों में बदलाव, अब सिर्फ स्मार्ट मीटर अनिवार्य
पहले 2022 की अधिसूचना के तहत स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य किए गए थे, लेकिन अब इस शर्त को हटा दिया गया है। नई व्यवस्था में केवल स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे, जिनमें रिमोट रीडिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी। साथ ही, जिन क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या है, वहां राज्य नियामक आयोग की अनुमति से वैकल्पिक व्यवस्था भी लागू की जा सकेगी।
उपभोक्ताओं को मिलेगा विकल्प, परिषद की आपत्ति का असर
इस फैसले से पहले राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने प्रीपेड मीटर को अनिवार्य बनाने का विरोध किया था। परिषद का कहना था कि यह प्रावधान विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के खिलाफ है। अब संशोधित अधिसूचना के बाद उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड मीटर के बीच चयन का विकल्प मिल जाएगा, जिसे उपभोक्ताओं के हित में बड़ा कदम माना जा रहा है।
मीटर बदलने पर 27 हजार करोड़ खर्च, उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा बोझ
केंद्र सरकार की Revamped Distribution Sector Scheme (RDSS) के तहत पुराने मीटरों को बदलकर स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में करीब 3 करोड़ 65 लाख उपभोक्ताओं के मीटर बदलने के लिए 27 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस योजना का खर्च उपभोक्ताओं से नहीं लिया जाएगा।
नई व्यवस्था से खासकर उन उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी जिन पर बिजली बिल का बकाया है, क्योंकि अब वे पोस्टपेड विकल्प चुनकर किस्तों में भुगतान कर सकेंगे।
