वाराणसी। काशी के ऐतिहासिक कबीरचौरा स्थित शिव प्रसाद गुप्त मंडलीय चिकित्सालय का स्वरूप अब पूरी तरह बदलने जा रहा है। केंद्र सरकार की पहल पर यहां करीब 315.48 करोड़ रुपये की …
वाराणसी। काशी के ऐतिहासिक कबीरचौरा स्थित शिव प्रसाद गुप्त मंडलीय चिकित्सालय का स्वरूप अब पूरी तरह बदलने जा रहा है। केंद्र सरकार की पहल पर यहां करीब 315.48 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक 500 बेड वाले मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शुभारंभ पूर्व मंत्री और शहर दक्षिणी के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने भूमि पूजन के साथ किया। उन्होंने कहा कि यह अस्पताल पूर्वांचल की चिकित्सा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।
अस्पताल में मिलेंगी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं
नए अस्पताल परिसर में मरीजों को एक ही छत के नीचे कई उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। इसमें 500 बेड की क्षमता के साथ 50 से अधिक ICU बेड और 100 से ज्यादा HDU बेड बनाए जाएंगे। इसके अलावा आधुनिक डायलिसिस सेंटर, अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, इमरजेंसी OT और बच्चों के लिए विशेष ICU यूनिट की भी व्यवस्था होगी।
अस्पताल में हृदय रोग, कैंसर, न्यूरो सर्जरी, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी और गैस्ट्रो विभाग जैसी सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही आधुनिक लैब, ब्लड बैंक, बर्न यूनिट और डे-केयर सेंटर भी तैयार किए जाएंगे।
आठ मंजिला भवन में बदलेगा पुराना अस्पताल
करीब डेढ़ सौ साल पुराने इस अस्पताल को आधुनिक आठ मंजिला मेडिकल सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। परियोजना पूरी होने के बाद मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े महानगरों या अन्य संस्थानों का रुख कम करना पड़ेगा।
डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि यह अस्पताल केवल वाराणसी ही नहीं, बल्कि बिहार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत पूरे पूर्वांचल के लाखों मरीजों के लिए राहत का केंद्र बनेगा।
पार्किंग और सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान
मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा को देखते हुए नए परिसर में 600 से अधिक वाहनों की पार्किंग व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।
काशी में शुरू हुई इस परियोजना को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है, जिससे पूर्वांचल में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार होगा।
चंदौली। चंदौली में जीटी रोड चौड़ीकरण के लिए चलाया जा रहा अतिक्रमण हटाओ अभियान शनिवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीम ने पोकलेन मशीनों की …
चंदौली। चंदौली में जीटी रोड चौड़ीकरण के लिए चलाया जा रहा अतिक्रमण हटाओ अभियान शनिवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीम ने पोकलेन मशीनों की मदद से सड़क किनारे बने आठ बड़े निर्माण गिरा दिए। कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में धूल का गुबार छाया रहा और बाजार में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला।
सुबह करीब 10 बजे एसडीएम अनुपम मिश्रा और सीओ अरुण कुमार सिंह की अगुवाई में परमार कटरा क्षेत्र से अभियान की शुरुआत हुई। इसके बाद टीम काली मंदिर तक पहुंची और सड़क की उत्तरी पटरी पर बने अतिक्रमण हटाए गए। कई भवन स्वामियों ने प्रशासनिक कार्रवाई से पहले ही अपने निर्माण खुद तोड़ना शुरू कर दिया, जिससे प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान रही।
दिनभर बाजार में ड्रिल मशीन, हैमर और जनरेटर की आवाज गूंजती रही। तेज धूप के बावजूद बड़ी संख्या में लोग मौके पर मौजूद रहे। कई स्थानों पर मजदूरों की मदद ली गई, जबकि कुछ जगहों पर मकान मालिक और उनके परिजन खुद ही ढांचा गिराते नजर आए। सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, जिसमें महिला और पुरुष दोनों कर्मी शामिल थे।
कार्रवाई के दौरान कुछ भावुक दृश्य भी सामने आए। एक बुजुर्ग महिला ने अधिकारियों से अनुरोध करते हुए कहा कि उसके पास मकान तोड़ने के लिए पैसे नहीं हैं, इसलिए प्रशासन ही इसे गिरा दे। वहीं कुछ लोगों ने मौके का फायदा उठाकर किरायेदारों के कब्जे वाले हिस्सों को खुद ही ध्वस्त कर दिया, जिससे बाजार में चर्चाओं का माहौल बना रहा।
निर्माण तोड़ने के लिए ठेकेदारों की मांग बढ़ गई है। छोटी दुकानों को गिराने के लिए 8 से 10 हजार रुपये तक लिए जा रहे हैं, जबकि बड़े भवनों के लिए एक लाख रुपये तक का खर्च आ रहा है। इसके लिए बाहर से भी विशेषज्ञ बुलाए जा रहे हैं।
बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोगों को और परेशानी उठानी पड़ रही है। ड्रिल और अन्य मशीनें चलाने के लिए जनरेटर का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे खर्च बढ़ गया है।
PWD अधिकारियों के अनुसार, रविवार को परीक्षा के कारण अभियान रोका जाएगा और सोमवार से दोबारा कार्रवाई शुरू की जाएगी। लोगों से अपील की गई है कि वे स्वेच्छा से अतिक्रमण हटा लें, अन्यथा विभाग सख्त कदम उठाएगा।
वाराणसी। आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की नगरी काशी एक बार फिर धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। शिव की नगरी, भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश …
वाराणसी। आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की नगरी काशी एक बार फिर धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। शिव की नगरी, भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली और संत परंपरा की पावन भूमि काशी अब जैन धर्मावलंबियों के लिए भी आकर्षण का बड़ा केंद्र बनती जा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जैन सर्किट योजना के तहत चंद्रावती में गंगा किनारे एक भव्य पक्का घाट तैयार कराया है, जिससे इस क्षेत्र को नई पहचान मिली है।
वाराणसी मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर गाजीपुर मार्ग पर स्थित चंद्रावती गांव में जैन धर्म के आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु जी की जन्मस्थली पर 17.06 करोड़ रुपये की लागत से तीन-स्तरीय आधुनिक घाट का निर्माण किया गया है। लगभग 200 मीटर लंबे इस घाट का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित वाराणसी दौरे के दौरान किया।
चंद्रावती जैन श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। यहां श्वेतांबर और दिगंबर दोनों परंपराओं के मंदिर मौजूद हैं, जहां देश और विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भगवान चंद्रप्रभु जी की जन्मभूमि पर निर्मित यह घाट धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं का बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरेगा।
यह स्थान जैन धर्म के इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि भगवान चंद्रप्रभु जी के चार प्रमुख कल्याणक—च्यवन, जन्म, दीक्षा और केवल ज्ञान—यहीं से संबंधित हैं। यहां स्थित प्राचीन मंदिर करीब 500 वर्षों से भी अधिक पुराना बताया जाता है। जैन ग्रंथों के अनुसार भगवान चंद्रप्रभु का जन्म राजा महासेन और रानी लक्ष्मणा के यहां हुआ था और उन्होंने गंगा तट पर तपस्या कर केवल ज्ञान प्राप्त किया था।
पर्यटन विभाग के अनुसार घाट के निर्माण और सुविधाओं के विस्तार से चंद्रावती आने वाले समय में प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में विकसित होगा। इसे जलमार्ग से जोड़ने की भी योजना है, जिससे श्रद्धालु नाव और क्रूज के माध्यम से यहां आसानी से पहुंच सकेंगे। राज्य सरकार आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है, जिससे न केवल धार्मिक स्थलों को वैश्विक पहचान मिलेगी बल्कि स्थानीय स्तर पर विकास को भी गति मिलेगी।
इस घाट को आधुनिक रिवर फ्रंट की तर्ज पर विकसित किया गया है, जो एक ओर नदी किनारे स्थित मंदिरों को कटाव से सुरक्षित रखेगा, वहीं पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। निर्माण में कम कार्बन उत्सर्जन वाली तकनीकों का उपयोग किया गया है। घाट को पारंपरिक स्वरूप देने के लिए गैबियन और रिटेनिंग वॉल तकनीक अपनाई गई है, जिससे यह देखने में प्राचीन घाटों जैसा प्रतीत होगा और बाढ़ के समय भी सुरक्षित रहेगा।
घाट पर तीन स्तरों वाले प्लेटफॉर्म, चौड़ी सीढ़ियां, शौचालय, पोर्टेबल चेंजिंग रूम, साइनेज, पार्किंग व्यवस्था, पत्थर की बेंच और आकर्षक रेलिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। यह परियोजना न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती देगी बल्कि पर्यटन को भी नई दिशा प्रदान करेगी।
चंदौली। उत्तर प्रदेश के हरदोई जनपद स्थित सनबीम स्कूल से जुड़ा मामला इन दिनों शिक्षा क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के …
चंदौली। उत्तर प्रदेश के हरदोई जनपद स्थित सनबीम स्कूल से जुड़ा मामला इन दिनों शिक्षा क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद शुरू हुए विवाद को लेकर विभिन्न स्तरों पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी बीच विद्यालय प्रबंधक संघ ने पूरे मामले की निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच की मांग की है।
विद्यालय प्रबंधक संघ के प्रदेश संयोजक डॉ. विनय कुमार वर्मा ने कहा कि किसी भी अभिभावक के साथ सार्वजनिक रूप से अनुचित व्यवहार या अपमानजनक भाषा का प्रयोग स्वीकार्य नहीं हो सकता। विद्यालयों में संवाद, संयम और गरिमा का वातावरण बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। यदि कहीं संवाद की मर्यादा भंग होने की स्थिति सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और निर्णय केवल तथ्यों के आधार पर लिया जाना चाहिए।
संघ ने कहा कि केवल एक वायरल वीडियो के आधार पर बिना समुचित जांच के किसी भी विद्यालय, उसकी शैक्षिक व्यवस्था, वर्षों की उपलब्धियों और विद्यार्थियों के भविष्य को सवालों के घेरे में खड़ा करना उचित नहीं है। किसी भी शैक्षणिक संस्था का मूल्यांकन उसके दीर्घकालिक योगदान, अनुशासन, परिणाम और सामाजिक भूमिका के आधार पर होना चाहिए।
उन्होंने मांग की है कि जिला प्रशासन इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए तथा वर्तमान छात्रों, पूर्व विद्यार्थियों और अभिभावकों से भी राय ली जाए,
ताकि विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता और कार्यप्रणाली की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
साथ ही दोनों पक्षों की बातों को समान रूप से सुनकर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाए।
विद्यालय प्रबंधक संघ का कहना है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी निर्णय से पहले संतुलन, संयम और निष्पक्षता अत्यंत आवश्यक है।
किसी एक घटना के आधार पर व्यापक निष्कर्ष निकालना शिक्षा व्यवस्था और समाज दोनों के हित में नहीं होगा।
संघ ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि मामले की पारदर्शी जांच कराकर न्यायसंगत निर्णय लिया जाए, जिससे सत्य सामने आए और शिक्षा संस्थानों के प्रति समाज का विश्वास भी बना रहे।
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दो दिवसीय काशी दौरे के दौरान मंगलवार को Varanasi को विकास की बड़ी सौगात दी। इस दौरान कुल 6,332.08 करोड़ रुपये लागत की 163 परियोजनाओं …
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दो दिवसीय काशी दौरे के दौरान मंगलवार को Varanasi को विकास की बड़ी सौगात दी। इस दौरान कुल 6,332.08 करोड़ रुपये लागत की 163 परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया। इसमें 1,054.69 करोड़ रुपये की 50 परियोजनाओं का लोकार्पण तथा 5,277.39 करोड़ रुपये की 113 परियोजनाओं का शिलान्यास शामिल है।
प्रधानमंत्री के काशी आगमन पर बाबतपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने उनका स्वागत किया। इसके बाद सेना के हेलीकॉप्टर से वे बीएलडब्ल्यू हेलीपैड पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका भव्य स्वागत किया।
इस दौरान प्रधानमंत्री ने बरेका में आयोजित महिला सम्मेलन को संबोधित किया और महिला सशक्तिकरण को विकास का मुख्य आधार बताया। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और उन्हें हर स्तर पर समान अवसर मिले।
प्रधानमंत्री ने काशी को 6,332.08 करोड़ रुपये की 163 परियोजनाओं की सौगात दी। लोकार्पण में 308.09 करोड़ रुपये की एसटीपी, 144.43 करोड़ रुपये का कज्जाकपुरा आरओबी और 45.91 करोड़ रुपये का सोवा रिग्पा मेडिकल कॉलेज प्रमुख रहे। वहीं शिलान्यास में 2,464.46 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला मालवीय पुल के पास सिग्नेचर ब्रिज, 1,582.99 करोड़ रुपये की सीवरेज व वाटर सप्लाई योजना और 429.36 करोड़ रुपये का कबीरचौरा मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल शामिल है।
गंगा किनारे घाटों के विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी कई परियोजनाओं की शुरुआत की गई। कुल 41 करोड़ 21 लाख रुपये की योजनाओं के तहत घाटों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। विशेष रूप से दशाश्वमेध घाट के विकास के लिए 827 लाख रुपये की योजना का शिलान्यास किया गया। राजेंद्र प्रसाद, मान मंदिर और त्रिपुरा भैरवी घाटों का भी पुनर्विकास किया जाएगा।
संत कबीर प्राकट्य स्थली पर्यटन विकास – ₹6.53 करोड़
सारनाथ सारंगनाथ मंदिर विकास – ₹2.92 करोड़
संत रविदास पार्क सौंदर्यीकरण – ₹2.75 करोड़
चन्द्रावती घाट पुनर्निर्माण – ₹7.58 करोड़
डिस्ट्रिक्ट पब्लिक हेल्थ लैब – ₹0.83 करोड़
2 ट्रांसफर स्टेशन निर्माण – ₹1.80 करोड़
🟠 शिलान्यास परियोजनाएँ (कुल ₹5277.39 करोड़)
🏗️ मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर
सिग्नेचर ब्रिज (मालवीय पुल के पास) – ₹2464.46 करोड़
500 बेड सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल – ₹315.48 करोड़
दीनदयाल चिकित्सालय रीमॉडलिंग – ₹113.88 करोड़
एकीकृत मण्डलीय कार्यालय परियोजना – ₹150.36 करोड़
🚧 सड़क एवं परिवहन विकास
71 ग्रामीण सड़कें – ₹116.46 करोड़
वाराणसी–आजमगढ़ रोड चौड़ीकरण – ₹277.43 करोड़
वाराणसी बाईपास सर्विस रोड – ₹121.28 करोड़
रेलवे ओवरब्रिज (लाट भैरव क्षेत्र) – ₹144.53 करोड़
रेल ओवरब्रिज (कादीपुर स्टेशन क्षेत्र) – ₹51.39 करोड़
💧 सीवर एवं पेयजल परियोजनाएँ
नगरीय सीवरेज व वाटर सप्लाई योजना – ₹1582.99 करोड़
रामनगर पेयजल योजना – ₹90.85 करोड़
सुजाबाद पेयजल विस्तार – ₹34.78 करोड़
हुकुलगंज सीवर योजना – ₹119.35 करोड़
दुर्गाकुंड–भेलूपुर सीवर योजना – ₹266.49 करोड़
शिवपुरवा–काजीपुरा सीवर योजना – ₹184.88 करोड़
प्रहलाद घाट सीवर योजना – ₹58.94 करोड़
🏞️ घाट एवं पर्यटन विकास
दशाश्वमेध घाट विकास – ₹8.28 करोड़
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर घाट विकास – ₹6.16 करोड़
अस्सी घाट से रविदास घाट विकास – ₹8.24 करोड़
गोला घाट से नमो घाट विकास – ₹6.18 करोड़
अस्सी घाट पुनर्विकास – ₹6.21 करोड़
🏥 स्वास्थ्य एवं शिक्षा
100 बेड क्रिटिकल केयर ब्लॉक – ₹34.97 करोड़
बाल आश्रय गृह – ₹14.91 करोड़
मॉडल विद्यालय – ₹24.51 करोड़
नगर निगम भवन – ₹97.00 करोड़
🏢 अन्य परियोजनाएँ
अस्सी घाट मैकेनाइज्ड पार्किंग – ₹9.84 करोड़
लेगेसी वेस्ट प्रबंधन – ₹53.15 करोड़
6 ट्रांसफर स्टेशन – ₹22.27 करोड़
विद्युत उपकेंद्र – ₹13.85 करोड़
इन परियोजनाओं के माध्यम से वाराणसी में सड़क, जल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और शहरी ढांचे को आधुनिक रूप दिया जा रहा है। कुल ₹6332 करोड़ से अधिक की यह योजना काशी को एक वैश्विक धार्मिक और आधुनिक शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम है।
वाराणसी। बनारस रेल इंजन कारखाना (BLW) परिसर में मंगलवार को आयोजित भव्य जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति, विकास और राजनीति के मुद्दों को केंद्र में रखते हुए विपक्षी …
वाराणसी। बनारस रेल इंजन कारखाना (BLW) परिसर में मंगलवार को आयोजित भव्य जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति, विकास और राजनीति के मुद्दों को केंद्र में रखते हुए विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार किया। अपने दो दिवसीय काशी दौरे के दौरान उन्होंने एक ओर जहां हजारों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात दी, वहीं महिला आरक्षण को लेकर भी बड़ा संदेश दिया।
नारी शक्ति को समर्पित रहा पूरा आयोजन
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत “नम: पार्वती पतये, हर-हर महादेव” के उद्घोष के साथ की और काशी की आध्यात्मिक पहचान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण का उत्सव है। उन्होंने काशी की महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि देश को विकसित बनाने के लक्ष्य में नारी शक्ति सबसे मजबूत स्तंभ है और इसी उद्देश्य से वह महिलाओं का आशीर्वाद लेने आए हैं।
महिला आरक्षण पर समर्थन की अपील
प्रधानमंत्री ने लोकसभा और विधानसभा में महिला आरक्षण लागू करने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि यह केवल एक नीति नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे इस अभियान को मजबूत करें ताकि अधिक से अधिक बेटियां निर्णय लेने वाली संस्थाओं तक पहुंच सकें।
विपक्ष पर सीधा हमला
अपने भाषण में उन्होंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके जैसे दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इन पार्टियों ने वर्षों तक महिला आरक्षण को लागू नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि ये दल नहीं चाहते थे कि सामान्य परिवारों की बेटियां राजनीति में आगे बढ़ें, लेकिन अब देश की महिलाएं जागरूक हो चुकी हैं और अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं।
विकास योजनाओं की बड़ी सौगात
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने वाराणसी और पूर्वांचल के लिए लगभग 6,300 करोड़ रुपये से अधिक की 163 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इन योजनाओं में सड़क और रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करना, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, घाटों का विकास, किसानों के लिए भंडारण सुविधाएं और शहरी बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाना शामिल है। इन परियोजनाओं से क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
महिला सशक्तिकरण योजनाओं का जिक्र
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले वर्षों में करोड़ों महिलाओं के बैंक खाते खोले गए, घर-घर शौचालय बनाए गए, बिजली और नल से जल की सुविधा पहुंचाई गई। सुकन्या समृद्धि योजना, मुद्रा योजना और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया गया है। उन्होंने बताया कि देश में तीन करोड़ से अधिक महिलाएं अब “लखपति दीदी” बन चुकी हैं, जो इस परिवर्तन की जीवंत मिसाल हैं।
सुरक्षा और सम्मान पर जोर
उन्होंने उत्तर प्रदेश में बदले हुए कानून-व्यवस्था के हालात का जिक्र करते हुए कहा कि पहले महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन अब अपराधियों में कानून का डर है। नए कानूनों और सख्त कार्रवाई के चलते महिला अपराधों में तेजी से न्याय मिल रहा है, जिससे महिलाओं में सुरक्षा और सम्मान की भावना मजबूत हुई है।
काशी की विरासत और आधुनिक विकास
प्रधानमंत्री ने कहा कि काशी केवल एक शहर नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और परंपरा का केंद्र है। उन्होंने इसे “अविनाशी” बताते हुए कहा कि यहां की विरासत को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक विकास का कार्य लगातार जारी रहेगा। काशी का विकास देश के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गौरव को भी मजबूत करता है।
स्वागत और कार्यक्रम की झलक
इससे पहले वाराणसी पहुंचने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बाबतपुर एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री का स्वागत किया। इसके बाद वे हेलीकॉप्टर से BLW परिसर पहुंचे, जहां हजारों की संख्या में महिलाएं और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम स्थल पर उत्साह का माहौल रहा और महिला भागीदारी विशेष रूप से चर्चा का केंद्र बनी रही।
राजनीतिक और सामाजिक संदेश
इस जनसभा के माध्यम से जहां एक ओर विकास परियोजनाओं की शुरुआत की गई, वहीं महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक संदेश भी दिया गया। कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि आने वाले समय में नारी शक्ति और विकास का मुद्दा राजनीति के केंद्र में बना रहेगा।
मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में रीवा-मिर्जापुर हाईवे स्थित ड्रमंडगंज घाटी में हुए भीषण सड़क हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। ट्रक, ट्रेलर, स्विफ्ट कार और बोलेरो …
मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में रीवा-मिर्जापुर हाईवे स्थित ड्रमंडगंज घाटी में हुए भीषण सड़क हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। ट्रक, ट्रेलर, स्विफ्ट कार और बोलेरो की आपस में टक्कर के बाद लगी आग में 12 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई। मरने वालों में दो मासूम बच्चे भी शामिल हैं।
10 मिनट तक गूंजती रहीं चीखें, फिर सब कुछ खामोश
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसे के तुरंत बाद वाहनों में फंसे लोग करीब 10 मिनट तक मदद के लिए चीखते रहे। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और बोलेरो व कार आग का गोला बन गईं। स्थानीय लोग बचाव की कोशिश करते रहे, लेकिन आग इतनी तेज थी कि कोई भी अंदर फंसे लोगों तक नहीं पहुंच सका।
ऐसे हुआ भीषण हादसा
जानकारी के अनुसार, ड्रमंडगंज घाटी में एक गिट्टी से भरा ट्रेलर ढलान से उतर रहा था। उसके पीछे स्विफ्ट कार, फिर दाल से लदा ट्रक और सबसे पीछे बोलेरो चल रही थी। इसी दौरान ट्रक का ब्रेक फेल हो गया और उसने आगे चल रही कार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर के बाद कार ट्रेलर से जा भिड़ी, जबकि पीछे से आ रही बोलेरो भी ट्रक में घुस गई। टक्कर के तुरंत बाद बोलेरो में आग लग गई।
बोलेरो में जिंदा जले 9 लोग
हादसे के बाद बोलेरो में सवार 9 लोग बाहर नहीं निकल सके और जिंदा जल गए। वहीं स्विफ्ट कार चालक और ट्रक के खलासी की भी मौत हो गई। बाद में घायल ट्रक चालक ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिससे कुल मृतकों की संख्या 12 हो गई।
पोस्टमार्टम में झकझोर देने वाला मंजर
गुरुवार सुबह जब शवों का पोस्टमार्टम शुरू हुआ तो दृश्य बेहद दर्दनाक था। कई शव पूरी तरह जल चुके थे और सिर्फ अवशेष ही बचे थे। बच्चों के शव देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। शवों की पहचान करना भी मुश्किल हो रहा है।
घंटों बाद बुझी आग, प्रशासन मौके पर
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं। दमकल की दो गाड़ियों ने घंटों मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्यों का जायजा लिया।
शुरुआती जांच में ब्रेक फेल होने की आशंका
पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच में हादसे की वजह ट्रक का ब्रेक फेल होना सामने आया है। हालांकि, अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। इस हादसे के बाद मृतकों के परिवारों में मातम पसरा हुआ है। कई घरों के चिराग एक ही हादसे में बुझ गए। प्रशासन शवों की शिनाख्त कराने और आगे की कार्रवाई में जुटा है।
वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाली “काशी प्रेरणा” पहल अब एक मजबूत ब्रांड के रूप में उभरकर सामने आई है। यह …
वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाली “काशी प्रेरणा” पहल अब एक मजबूत ब्रांड के रूप में उभरकर सामने आई है। यह पहल न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि उन्हें एक नई पहचान और आत्मविश्वास भी दे रही है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़ी स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को अब “काशी प्रेरणा” के नाम से एकीकृत ब्रांड पहचान दी गई है। इससे पहले ये उत्पाद अलग-अलग नामों से स्थानीय बाजारों तक सीमित थे, लेकिन अब इन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने लगी है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से खुल रहे नए अवसर
समय के साथ कदम मिलाते हुए “काशी प्रेरणा” के उत्पाद अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे फ्लिपकार्ट, अमेज़न और मीशो पर भी उपलब्ध हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पादों को देशभर के ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ने के बाद बिक्री में वृद्धि के साथ-साथ महिलाओं की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी जा रही है।
हजारों महिलाओं को मिला रोजगार और पहचान
इस पहल के माध्यम से वाराणसी जिले में हजारों महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर मिला है। वर्तमान में:
12,000 से अधिक स्वयं सहायता समूह सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं
1.5 लाख से ज्यादा महिलाएं इस अभियान से जुड़ी हुई हैं
65 से अधिक रिटेल आउटलेट्स ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि “काशी प्रेरणा” केवल एक योजना नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन का रूप ले चुकी है, जो महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित कर रही है।
हस्तशिल्प से लेकर खाद्य उत्पाद तक विस्तृत रेंज
“काशी प्रेरणा” के तहत तैयार किए जा रहे उत्पादों में हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्त्र, घरेलू उपयोग की सामग्री, खाद्य पदार्थ, सजावटी आइटम और कई अन्य उपयोगी चीजें शामिल हैं। इन उत्पादों में स्थानीय कला, संस्कृति और परंपरा की झलक साफ दिखाई देती है, जो इन्हें बाजार में अलग पहचान दिलाती है।
सरकारी पहल से मिला बड़ा मंच
यह पहल राज्य सरकार के सहयोग से संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाना और उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाना है। “काशी प्रेरणा” के जरिए महिलाओं को प्रशिक्षण, विपणन सहायता और ब्रांडिंग जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं, जिससे वे अपने उत्पादों की गुणवत्ता और प्रस्तुति को बेहतर बना सकें।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत कदम
“काशी प्रेरणा” पहल महिलाओं के जीवन में बदलाव लाने के साथ-साथ “आत्मनिर्भर भारत” के सपने को भी साकार करने में अहम भूमिका निभा रही है। यह पहल दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी बड़े स्तर पर सफलता हासिल कर सकती हैं।
कुल मिलाकर, “काशी प्रेरणा” अब सिर्फ एक ब्रांड नहीं, बल्कि महिलाओं के सपनों, संघर्ष और सफलता की कहानी बन चुकी है, जो पूरे देश के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है।
वाराणसी: पूर्वांचल सहित वाराणसी में गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। तापमान सामान्य से ऊपर पहुंच गया है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी और लू का सामना करना …
वाराणसी: पूर्वांचल सहित वाराणसी में गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। तापमान सामान्य से ऊपर पहुंच गया है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी और लू का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। रविवार सुबह तक मौसम कुछ हद तक सामान्य रहा और हल्की हवाओं से राहत मिली, लेकिन सुबह 9 बजे के बाद तेज धूप और गर्म हवाओं ने असर दिखाना शुरू कर दिया। दोपहर तक लू के थपेड़ों ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी।
पिछले 24 घंटों में वाराणसी का अधिकतम तापमान 41.8°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब 2 डिग्री अधिक है, जबकि न्यूनतम तापमान 23°C रहा। आर्द्रता 19% से 35% के बीच दर्ज की गई, जिससे उमस भी बढ़ रही है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ का असर कमजोर पड़ने से तापमान में तेजी आई है। आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान और बढ़ सकता है, जिससे हीट स्ट्रोक और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाएगा।
हालांकि आगे चलकर वातावरण में नमी बढ़ने के संकेत हैं, जिससे बादलों की सक्रियता और प्री-मानसून बारिश की संभावना बन सकती है। लेकिन फिलहाल अगले कुछ दिनों तक गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद कम है।
वाराणसी। पूर्वांचल के चर्चित टकसाल सिनेमा शूटआउट केस में एमपी-एमएलए कोर्ट से बरी होने के बाद विधायक अभय सिंह ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी है। करीब 24 वर्षों तक चले …
वाराणसी। पूर्वांचल के चर्चित टकसाल सिनेमा शूटआउट केस में एमपी-एमएलए कोर्ट से बरी होने के बाद विधायक अभय सिंह ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी है। करीब 24 वर्षों तक चले इस कानूनी संघर्ष के बाद मिली राहत को उन्होंने “सत्य और न्याय की जीत” बताया है।
अभय सिंह ने अपने बयान में पूर्व सांसद धनंजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें एक सुनियोजित साजिश के तहत झूठे मामले में फंसाया गया था। उनका कहना है कि उस समय के प्रशासनिक तंत्र का भी इसमें सहयोग रहा, जिसकी वजह से उन्हें लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।
उन्होंने कहा कि इतने वर्षों तक चले इस मुकदमे ने उनके जीवन और राजनीतिक करियर को प्रभावित किया, लेकिन उन्हें हमेशा न्यायपालिका पर भरोसा रहा। कोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने राहत जताते हुए कहा कि आखिरकार सच सामने आ ही गया।
इस दौरान अभय सिंह ने भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा की भी सराहना की और संकेत दिए कि वह आने वाले समय में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं। उनके इस बयान के बाद क्षेत्रीय राजनीति में नई हलचल देखी जा रही है।
गौरतलब है कि वाराणसी के टकसाल सिनेमा के बाहर हुए इस शूटआउट मामले ने उस समय दो जिलों की राजनीति को हिला दिया था। अब अदालत के फैसले के बाद यह मामला कानूनी रूप से समाप्त हो गया है, लेकिन इसके राजनीतिक मायने अभी भी चर्चा में बने हुए हैं।