वाराणसी। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर वाराणसी के घरेलू और व्यावसायिक गैस बाजार पर दिखाई देने लगा है। जिले में एलपीजी सिलेंडरों की भारी किल्लत के कारण उपभोक्ताओं को ईद जैसे त्योहार पर भी गैस एजेंसियों और गोदामों के चक्कर काटने पड़े। आलम यह है कि बुकिंग के हफ्ते भर बाद भी गैस घर नहीं पहुंच रही है, जिससे त्रस्त होकर लोग अब सीधे गोदामों पर भीड़ लगा रहे हैं।
बुकिंग और डिलीवरी का बिगड़ा गणित
वाराणसी जिले में वर्तमान में गैस की मांग और आपूर्ति के बीच एक बड़ी खाई पैदा हो गई है। गैस एजेंसी संचालकों के अनुसार, युद्ध की खबरों के बीच लोगों में एक प्रकार का ‘पैनिक’ (डर) है, जिसके कारण सिलेंडर की बुकिंग में अचानक उछाल आया है। प्रतिदिन 500 से 600 सिलेंडरों की बुकिंग हो रही है, जबकि तेल कंपनियों से आपूर्ति केवल 300 सिलेंडरों के आसपास ही मिल पा रही है। इस असंतुलन के कारण जिले की प्रमुख एजेंसियों पर 3000 से अधिक सिलेंडरों की पेंडेंसी (बकाया) खड़ी हो गई है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बढ़ी पाबंदियां
गैस की किल्लत को देखते हुए रिफिल बुकिंग के नियमों में भी सख्ती कर दी गई है। शहर में एक रिफिल के बाद दूसरी बुकिंग के लिए 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन की समय सीमा अनिवार्य कर दी गई है। इस नियम के कारण वे उपभोक्ता सबसे ज्यादा परेशान हैं जिनका परिवार बड़ा है और गैस जल्दी खत्म हो जाती है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि टोल-फ्री नंबर अक्सर व्यस्त रहता है और ऑनलाइन बुकिंग न होने की स्थिति में उन्हें घंटों एजेंसी की कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।
शादियों के सीजन पर संकट: कैटरर्स की नई शर्त
इस गैस संकट का सबसे अनोखा और गंभीर असर सहालग (शादियों के सीजन) पर पड़ रहा है। अप्रैल और मई महीने की बुकिंग के लिए कैटरर्स ने अब नई शर्तें रख दी हैं। शहर के प्रमुख कैटरर शरद श्रीवास्तव ने बताया कि कमर्शियल गैस सिलेंडर न मिलने के कारण वे अब उन्हीं शादियों की बुकिंग ले रहे हैं जहाँ क्लाइंट खुद गैस सिलेंडर की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी उठा रहा है। जो ग्राहक गैस देने से मना कर रहे हैं, उनका काम लेने से कैटरर साफ मना कर दे रहे हैं।
हॉस्टल और रेस्टोरेंट में लौटे ‘कोयले के दिन‘
कमर्शियल गैस की अनुपलब्धता ने शहर के खान-पान उद्योग को दशकों पीछे धकेल दिया है। निजी हॉस्टलों के किचन एक सप्ताह से बंद पड़े हैं, जिससे छात्रों को मेस में सीमित मेन्यू या बाहर खाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। शहर के कई छोटे रेस्टोरेंट, स्ट्रीट वेंडर्स और ढाबों ने गैस न मिलने पर कोयले के चूल्हे और भट्ठियों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। कई छोटे दुकानदार तो अपना धंधा समेटकर दूसरे कामों की तलाश में लग गए हैं।
वाराणसी गैस संकट: मुख्य आंकड़े (Fact Table)
| विवरण | वर्तमान स्थिति |
| दैनिक बुकिंग | 500 – 600 सिलेंडर |
| दैनिक आपूर्ति | लगभग 300 सिलेंडर |
| कुल पेंडेंसी | 3000+ सिलेंडर (अनुमानित) |
| डिलीवरी समय | बुकिंग के 10-12 दिन बाद |
| बुकिंग अंतराल | शहर: 25 दिन, ग्रामीण: 45 दिन |
उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि इस संकट की आड़ में कुछ ट्रॉलीमैन अतिरिक्त पैसों की मांग कर रहे हैं। प्रशासन और आपूर्ति विभाग की ओर से फिलहाल कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने से जनता में भारी रोष है।
