वाराणसी। जनपद न्यायालय परिसर में शनिवार को आयोजित वर्ष 2026 की द्वितीय राष्ट्रीय लोक अदालत में रिकॉर्ड संख्या में मामलों का निस्तारण किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश संजीव शुक्ला ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। लोक अदालत के माध्यम से जनपद न्यायालय एवं प्रशासनिक विभागों में कुल 4 लाख 72 हजार 161 मामलों का निस्तारण करते हुए 20 करोड़ 49 लाख रुपये से अधिक की धनराशि की वसूली की गई।
राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान जनपद न्यायालय में कुल 33 हजार 807 वादों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में करीब 2 करोड़ 96 लाख 86 हजार 619 रुपये की धनराशि की वसूली हुई। वहीं प्रशासन एवं अन्य विभागों द्वारा 4 लाख 38 हजार 354 मामलों का निस्तारण कर लगभग 17 करोड़ 52 लाख 54 हजार 475 रुपये की वसूली के लिए समझौता कराया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला जज संजीव शुक्ला ने कहा कि लोक अदालत भारत की पारंपरिक न्याय व्यवस्था का आधुनिक स्वरूप है। उन्होंने कहा कि प्राचीन समय से ही पंचायतों और आपसी संवाद के जरिए विवादों का समाधान किया जाता रहा है, जिसे वर्ष 1987 के अधिनियम द्वारा विधिक मान्यता दी गई।
उन्होंने कहा कि लोक अदालत एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है, जहां बिना समय गंवाए गंभीर मामलों का भी आपसी सहमति से निस्तारण संभव हो रहा है। जिला जज ने पारिवारिक मामलों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए कहा कि परिवार समाज की मूल इकाई है और न्यायालय की जिम्मेदारी परिवारों को जोड़ने की होनी चाहिए, न कि तोड़ने की।
कार्यक्रम में प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय अनिरुद्ध कुमार तिवारी, मोटर दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी रामकेश, बनारस बार अध्यक्ष विनोद कुमार शुक्ला, सेंट्रल बार अध्यक्ष प्रेम प्रकाश गौतम, अपर जिला जज आलोक कुमार, मुख्य राजस्व अधिकारी अजीत कुमार, यूनियन बैंक के एलडीएम अविनाश अग्रवाल, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पूर्णकालिक सचिव राजीव मुकुल पांडेय सहित न्यायिक अधिकारी, बैंक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
