वाराणसी: शनिवार को भाजपा द्वारा निकाली गई एक स्कूटी रैली ने सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन के समर्थन में आयोजित इस ‘जनआक्रोश स्कूटी रैली’ में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। रैली की शुरुआत शहर के सिगरा स्थित तिलक प्रतिमा से हुई और यह लहुराबीर स्थित आज़ाद पार्क तक पहुंची।
इस दौरान रैली में शामिल अधिकांश महिलाएं बिना हेलमेट के स्कूटी चलाती नजर आईं। शुरुआत में कुछ महिलाएं हेलमेट पहनकर पहुंची थीं, लेकिन जब उन्होंने प्रमुख पदाधिकारियों को बिना हेलमेट देखा, तो उन्होंने भी हेलमेट उतारकर हाथ में पकड़ लिया।
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रैली में भाजपा के काशी क्षेत्र, जिला और महानगर इकाई के कई पदाधिकारी भी शामिल हुए। इस दौरान महिलाओं ने प्रधानमंत्री के प्रस्तावित वाराणसी दौरे को लेकर स्वागत के नारे भी लगाए। पूरे आयोजन में राजनीतिक माहौल भी साफ तौर पर दिखाई दिया।
रैली के कारण शहर के कई इलाकों में यातायात व्यवस्था प्रभावित रही। सड़क पर किसी प्रकार का डायवर्जन न होने और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती न होने के चलते आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। लहुराबीर चौराहे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई।
बनारस के स्थानीय लोगों में इस घटनाक्रम को लेकर नाराजगी साफ तौर पर देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि जब आम नागरिक जरा सी भी यातायात नियमों की अनदेखी करता है—जैसे बिना हेलमेट गाड़ी चलाना, गलत दिशा में वाहन चलाना या नो-एंट्री का उल्लंघन करना—तो ट्रैफिक पुलिस तुरंत चालान काट देती है, कई मामलों में भारी जुर्माना लगाया जाता है और जरूरत पड़ने पर वाहन तक सीज कर लिया जाता है।
लेकिन इसी शहर में जब राजनीतिक कार्यक्रमों या रैलियों के दौरान खुलेआम नियमों की अनदेखी होती है, तब प्रशासन की सख्ती कहीं नजर नहीं आती। लोगों का आरोप है कि नेताओं और उनके समर्थकों के लिए नियम सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाते हैं, जबकि आम जनता को हर हाल में उनका पालन करना पड़ता है।
इस आयोजन में महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि, पूर्व लोकसभा प्रत्याशी शालिनी यादव, भाजपा काशी क्षेत्र मंत्री पूजा दीक्षित और बेटी बचाओ समिति की काशी क्षेत्र अध्यक्ष सुष्मिता सेठ सहित कई प्रमुख महिलाएं और कार्यकर्ता मौजूद रहीं।

गौरतलब है कि इससे दो दिन पहले भी भाजपा महिला मोर्चा ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। उस दौरान महिला कार्यकर्ताओं ने पदयात्रा निकालकर विपक्षी दलों के खिलाफ नारेबाजी की थी और लहुराबीर चौराहे पर राहुल गांधी और अखिलेश यादव के पुतले जलाए थे।
