वाराणसी, 4 अप्रैल। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को वाराणसी से ‘स्कूल चलो अभियान’ का भव्य शुभारंभ करते हुए इसे जनांदोलन बनाने की अपील की। शिवपुर स्थित एक कंपोजिट विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री या प्रमाण पत्र प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति है।
हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने शिक्षकों और समाज के लोगों से आह्वान किया कि 1 से 15 अप्रैल तक घर-घर जाकर ऐसे बच्चों को चिन्हित करें जो स्कूल नहीं जा रहे हैं और उनका नामांकन सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा, “अगर कोई बच्चा स्कूल से बाहर है, तो यह सिर्फ उस परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज और सरकार की जिम्मेदारी है।”
2017 से पहले की स्थिति पर उठाए सवाल
सीएम योगी ने वर्ष 2017 से पहले की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि उस समय स्कूलों की स्थिति जर्जर थी और कई विद्यालय बंद होने की कगार पर थे। उन्होंने एक अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक स्कूल में मात्र 10 बच्चे बचे थे।
उन्होंने कहा कि उस समय बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि कम होने की बात कही जाती थी, लेकिन असल समस्या पढ़ाने की इच्छा और व्यवस्था की कमी थी। “बच्चों की जिज्ञासा को बढ़ाना हमारा काम है,” उन्होंने कहा।
शिक्षा सुधार और घटता ड्रॉपआउट
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार के प्रयासों से शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। जहां पहले ड्रॉपआउट दर 19% से अधिक थी, अब वह घटकर लगभग 3% रह गई है। उन्होंने इसे शून्य करने का लक्ष्य रखते हुए शिक्षकों से और प्रयास करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेसिक शिक्षा पर 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं, जिससे स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
‘ऑपरेशन कायाकल्प’ और ‘निपुण’ योजना की सफलता
सीएम योगी ने बताया कि ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के तहत 1.36 लाख से अधिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। नीति आयोग ने भी इसे देश की सफल पहल के रूप में सराहा है।
उन्होंने ‘ऑपरेशन निपुण’ का जिक्र करते हुए कहा कि इससे बच्चों में सीखने की जिज्ञासा बढ़ी है और शिक्षा का स्तर बेहतर हुआ है।
छात्राओं और गरीब बच्चों को मिल रही सुविधाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले बड़ी संख्या में छात्राएं बिना जूते-चप्पल के स्कूल जाती थीं, लेकिन अब सरकार की योजनाओं के तहत सभी बच्चों को यूनिफॉर्म, जूते, मोजे, बैग और किताबें मुफ्त दी जा रही हैं।
उन्होंने बताया that सत्र शुरू होने के बाद 15 अप्रैल और 15 जुलाई को दो चरणों में अभिभावकों के खातों में धनराशि सीधे भेजी जाएगी। इसके अलावा ‘सुमंगला योजना’ के तहत 25 लाख से अधिक बालिकाओं को लाभ दिया जा रहा है।
मिड-डे मील परोसा, बच्चों से किया संवाद
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यालय के बच्चों को मिड-डे मील अपने हाथों से परोसा और उनसे बातचीत की। उन्होंने बच्चों को नियमित स्कूल आने और मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर उन्होंने मेधावी और ‘निपुण’ छात्रों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए तथा शैक्षिक नवाचार पुस्तिका का विमोचन किया।
शिक्षा को बताया समाज परिवर्तन का आधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान देने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र निर्माण और समाज के समग्र विकास की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि जब समाज का हर बच्चा शिक्षित होगा, तभी सामाजिक और आर्थिक समानता संभव होगी।
मंत्रियों ने भी रखे विचार
कार्यक्रम में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि ‘स्कूल चलो अभियान’ बच्चों के भविष्य को संवारने का माध्यम है और पिछले वर्षों में परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर बदली है।
वहीं, मंत्री अनिल राजभर ने अटल आवासीय विद्यालयों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे मजदूरों के बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। स्टांप मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने भी शिक्षा व्यवस्था में आए सुधारों की सराहना की।
धार्मिक आस्था के साथ दिन की शुरुआत
इससे पहले मुख्यमंत्री ने काल भैरव मंदिर और काशी विश्वनाथ मंदिर में विधिवत दर्शन-पूजन किया और प्रदेश की खुशहाली की कामना की।