चंदौली। चेतना साहित्यिक मंच, चंदौली के तत्वावधान में एवं राष्ट्रीय चेतना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विनय कुमार वर्मा की नई पुस्तक ‘जीवन के मौलिक सूत्र’ का लोकार्पण समारोह सोमवार को देवांश हॉस्पिटल के सभागार में गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, शिक्षा, समाजसेवा और बौद्धिक जगत से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित लोगों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि केंद्रीय तिब्बती संस्थान/विश्वविद्यालय, वाराणसी की कुलसचिव डॉ. सुनीता चंद्रा द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद पुस्तक का औपचारिक विमोचन किया गया। सभागार में उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने तालियों की गूंज के बीच पुस्तक का स्वागत किया।

अपने संबोधन में डॉ. सुनीता चंद्रा ने कहा कि ‘जीवन के मौलिक सूत्र’ केवल एक साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि जीवन को समझने और आत्मविश्लेषण करने की प्रेरणादायक पहल है। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में व्यक्ति बाहरी उपलब्धियों की होड़ में स्वयं से दूर होता जा रहा है, ऐसे में यह पुस्तक आत्ममंथन और जागरूकता की दिशा में सार्थक प्रयास है।
विशिष्ट अतिथि कासगंज विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग की प्रोफेसर डॉ. सुशील आचार्य ने कहा कि वर्तमान समय की जटिलताओं के बीच यह पुस्तक विवेक, संतुलन और आत्मबोध का संदेश देती है। उन्होंने इसे युवाओं के लिए उपयोगी और प्रेरणादायी बताया।
पूर्व राजभाषा अधिकारी दिनेश चंद्र ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जीवन के छोटे-छोटे अनुभव ही मनुष्य को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं। उन्होंने लेखक को इस चिंतनशील कृति के लिए शुभकामनाएं दीं।
वरिष्ठ साहित्यकार दीनानाथ पांडे ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ-साथ उसका मार्गदर्शक भी होता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पुस्तक पाठकों को जीवन के वास्तविक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करेगी।

वहीं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शैलेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि आज का मनुष्य सूचनाओं से भर गया है, लेकिन आत्मचिंतन और ज्ञान की कमी महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक उस कमी को दूर करने का गंभीर प्रयास है। साथ ही लेखक की भाषा शैली और गहन चिंतन की सराहना भी की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. उमेश प्रसाद सिंह ने कहा कि डॉ. विनय कुमार वर्मा की लेखनी मानवीय संवेदनाओं और जीवनानुभवों से समृद्ध है। यह पुस्तक केवल विचार प्रस्तुत नहीं करती, बल्कि जीवन जीने की दिशा भी दिखाती है।
स्वागताध्यक्ष डॉ. डी.पी. सिंह ने अतिथियों एवं उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि साहित्यिक आयोजन समाज में सकारात्मक चेतना का संचार करते हैं और ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित होते रहने चाहिए।
अंत में लेखक डॉ. विनय कुमार वर्मा ने सभी अतिथियों, साहित्यप्रेमियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक उनके जीवन अनुभवों और आत्ममंथन का परिणाम है। यदि इसके विचार किसी एक व्यक्ति के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव ला सकें, तो उनका प्रयास सफल माना जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनिल यादव ने प्रभावशाली ढंग से किया। उन्होंने पुस्तक की विषयवस्तु और लेखक के साहित्यिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इस अवसर पर कवित्री डॉ. कृष्णा सिंह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला संघचालक रामकिशोर पोद्दार, समाजसेवी सतीश जिंदल, पत्रकार आसाराम यादव, कमलेश तिवारी, कवि प्रमोद रघुवंशी, हाजी वसीम अहमद, अरुण आर्य, आकाश मिश्रा, राज बनारसी, रोशन मुगलसरायी, प्रकाश चंद चौरसिया, एडवोकेट रंजीत, आराधना गुप्ता, मंजू वर्मा, विनीता अग्रहरि, मालती गुप्ता, विधु श्रीवास्तव, बिभा सिंह, प्रीति गुप्ता, डॉ. सुशील वर्मा, सत्यम वर्मा और सृष्टि सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।
