प्रतीक यादव की मौत के साथ खत्म हुआ मुलायम-साधना की ‘गुप्त’ प्रेम कहानी का अध्याय, ‘सैफई परिवार’ में शोक की लहर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे ताकतवर और चर्चित ‘सैफई परिवार’ से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। समाजवादी पार्टी के संरक्षक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे …
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे ताकतवर और चर्चित ‘सैफई परिवार’ से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। समाजवादी पार्टी के संरक्षक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव का 38 वर्ष की अल्पायु में निधन हो गया है। प्रतीक के निधन की खबर ने न केवल उनके परिवार को, बल्कि पूरे प्रदेश को हैरान कर दिया है। इसे महज एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि मुलायम सिंह और साधना गुप्ता की उस प्रेम कहानी के अंतिम जीवंत अध्याय का अंत माना जा रहा है, जिसने दशकों तक सियासी और सामाजिक चर्चाओं में जगह बनाई।
अस्पताल का घटनाक्रम: कैसे हुई मृत्यु?
जानकारी के अनुसार, बुधवार, 13 मई 2026 की तड़के सुबह प्रतीक यादव को सांस लेने में भारी तकलीफ महसूस हुई। उन्हें तुरंत लखनऊ के सिविल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। सुबह 5:55 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
चिकित्सीय कारण: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के विशेषज्ञों के अनुसार, उनकी मृत्यु का मुख्य कारण ‘कार्डियो-रेस्पिरेटरी कोलैप्स’ था। डॉक्टरों ने बताया कि वे पल्मोनरी थ्रोम्बोम्बोलिज्म से पीड़ित थे, जिसमें पैरों की नसों में बनने वाला खून का थक्का (DVT) फेफड़ों तक पहुँच जाता है और रक्त प्रवाह को बाधित कर देता है। यह स्थिति इतनी अचानक और गंभीर थी कि शरीर के अंगों ने काम करना बंद कर दिया।
मुलायम-साधना की ‘सीक्रेट’ लव स्टोरी और प्रतीक का अस्तित्व
प्रतीक यादव का जीवन हमेशा से ही मुलायम सिंह यादव के निजी जीवन के उस हिस्से से जुड़ा रहा, जो लंबे समय तक रहस्य के घेरे में था।

सालों का मौन: 80 और 90 के दशक में जब मुलायम सिंह यादव यूपी की राजनीति के ‘नेताजी’ बन रहे थे, तब साधना गुप्ता और प्रतीक उनके जीवन का एक ऐसा हिस्सा थे जिसे सार्वजनिक तौर पर स्वीकार नहीं किया गया था। प्रतीक का बचपन और शुरुआती युवावस्था काफी हद तक लाइमलाइट से दूर बीती।
मान्यता का संघर्ष: 2003 में मुलायम की पहली पत्नी मालती देवी के निधन के बाद, सुप्रीम कोर्ट में एक आय से अधिक संपत्ति के मामले के दौरान मुलायम सिंह यादव ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया कि साधना गुप्ता उनकी पत्नी हैं और प्रतीक उनके बेटे। इस खुलासे ने उस वक्त भारतीय राजनीति में भूचाल ला दिया था।
शक्ति का केंद्र: साधना गुप्ता को ‘पर्दे के पीछे की शक्ति’ माना जाता था। 2022 में साधना गुप्ता के निधन के बाद प्रतीक अकेले पड़ गए थे, और अब उनके चले जाने से उस पूरे कुनबे का वह सिरा हमेशा के लिए टूट गया है।
राजनीति से दूरी और निजी शौक
जहाँ पूरा यादव परिवार राजनीति में सक्रिय था, वहीं प्रतीक ने एक अलग राह चुनी। उन्होंने कभी चुनाव नहीं लड़ा और खुद को एक सफल बिजनेसमैन और फिटनेस आइकन के रूप में स्थापित किया।
फिटनेस साम्राज्य: वे लखनऊ के सबसे आधुनिक जिमों में से एक ‘आयरन कोर फिट’ के मालिक थे। उनके शारीरिक परिवर्तन (Body Transformation) की तस्वीरें अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होती थीं।
लक्जरी और शौक: प्रतीक को महंगी स्पोर्ट्स कारों का बेहद शौक था। उनकी 5 करोड़ की लेम्बोर्गिनी ने एक समय में काफी सुर्खियां बटोरी थीं।
पशु संरक्षण: वे ‘जीव आश्रय’ संस्था के माध्यम से हजारों घायल और लावारिस जानवरों की मदद करते थे, जो उनके संवेदनशील व्यक्तित्व को दर्शाता था।
अंतिम दिनों का संघर्ष और तनाव
बीते कुछ महीने प्रतीक के लिए मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण रहे थे। साल 2026 की शुरुआत में ही उन्होंने अपनी पत्नी अपर्णा यादव (जो भाजपा की वरिष्ठ नेता हैं) के साथ वैचारिक मतभेदों और तलाक की इच्छा को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट साझा किए थे। उन्होंने ‘मानसिक शांति’ की तलाश में खुद को काफी हद तक एकांत में कर लिया था।
सियासी शोक: एकजुट हुआ परिवार
इस दुख की घड़ी में वैचारिक मतभेदों को किनारे रखकर पूरा सैफई परिवार एक साथ खड़ा नजर आया।
अखिलेश यादव ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपना छोटा भाई खो दिया है।
अपर्णा यादव और उनकी बेटी के लिए यह अपूरणीय क्षति है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं ने इसे एक युवा जीवन का असामयिक अंत बताया है।











